बिहार

HIV संक्रमितों की संख्या बढ़ी, 7,400 रजिस्टर्ड मामले, परिवारों में चिंता की लहर

Gulabi Jagat
11 Dec 2025 9:28 PM IST
HIV संक्रमितों की संख्या बढ़ी, 7,400 रजिस्टर्ड मामले, परिवारों में चिंता की लहर
x
Sitamarhi, सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले में HIV संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ढाई साल पहले हरियाणा से घर लौटे मजदूर दीपक कुमार (नाम बदलकर) को बीमारी ने घेर लिया। अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि दीपक HIV पॉजिटिव हैं। दीपक और उनके परिवार वाले अब इस बीमारी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
सीतामढ़ी जिले में एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) केंद्र के आंकड़ों के अनुसार जिले में 7,400 लोग HIV संक्रमित हैं। यह संख्या साल 2012 के बाद लगातार बढ़ रही है। पहले संक्रमित व्यक्ति 30-50 साल की उम्र के होते थे, लेकिन अब 400 बच्चों सहित, किशोर और छोटे बच्चे भी इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।
केस स्टडी 1: जिले के सुप्पी प्रखंड के एक गांव में एक महिला और उसका बेटा HIV संक्रमित पाए गए। महिला का पति दिल्ली में ऑटो चलाता था और संक्रमित था। पत्नी और बेटे को भी पति के संपर्क में आने के कारण संक्रमण हुआ। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही दवाओं से महिला और उसका बच्चा स्वस्थ हैं।
केस स्टडी 2: परिहार प्रखंड के एक गांव में अरब देशों में मजदूरी करने वाले व्यक्ति को वापस लौटने पर HIV पॉजिटिव पाया गया। उनकी पत्नी भी संक्रमित थी। दोनों वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही दवाओं का सेवन कर रहे हैं। व्यक्ति ने कहा कि समय रहते सतर्क रहते तो यह स्थिति नहीं बनती।
केस स्टडी 3: बैरगनिया गांव के एक परिवार में पति, पत्नी और बच्ची सभी HIV पॉजिटिव पाए गए। पति नेपाल के काठमांडू में मजदूरी करते थे और वहीं संक्रमण हुआ। गांव लौटने पर पत्नी और गर्भावस्था के दौरान बच्ची भी संक्रमित हो गई।
HIV पॉजिटिव मरीज बताते हैं कि जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद समाज में छुआछूत और हीन भावना अभी भी मौजूद है। कई लोग उनसे बात करने से कतराते हैं, जबकि विशेषज्ञ बार-बार बता रहे हैं कि HIV छूने से नहीं फैलता।
विशेषज्ञों के अनुसार, अन्य प्रदेश और देशों में काम करने वाले मजदूर, साथ ही नेपाल की खुली सीमा, संक्रमण के फैलाव में योगदान कर रहे हैं। वर्तमान में जिले में लगभग 5,000 मरीज नियमित ART दवा ले रहे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि नियमित जांच, समय पर दवा और जागरूकता अभियान से संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्हें जरूरत है कि समाज की मानसिकता में बदलाव आए और संक्रमित व्यक्ति बिना डर और भेदभाव के अपने जीवन को सामान्य ढंग से जी सकें।
इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने ART केंद्रों की संख्या बढ़ाने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने और मरीजों की निगरानी मजबूत करने की योजना बनाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवारिक और सामाजिक सहयोग के बिना HIV संक्रमित व्यक्तियों की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा करना मुश्किल है।
Next Story