
पटना : बिहार में जमीन और संपत्ति की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब उन्हें रजिस्ट्री के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार अगले महीने यानी अगस्त से प्रदेश में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस करने जा रही है। इसके तहत राज्य के सभी 145 निबंधन कार्यालयों में रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन और संपत्ति के दस्तावेजों से जुड़े काम ऑनलाइन तरीके से किए जाएंगे। इससे न केवल प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि इसमें पारदर्शिता भी बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से लोगों का समय बचेगा और रजिस्ट्री प्रक्रिया में होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकेगा।
राज्य के निबंधन विभाग ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि इसी महीने पटना, मधुबनी समेत करीब दो दर्जन निबंधन कार्यालयों को पेपरलेस प्रणाली से जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद अगस्त से पूरे राज्य के सभी निबंधन कार्यालयों में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
फिलहाल जमीन रजिस्ट्री के दौरान कई चरणों में कागजी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। लोगों को आवेदन, दस्तावेजों की जांच और अन्य प्रक्रियाओं के लिए कार्यालयों में जाना पड़ता है। नई डिजिटल व्यवस्था के तहत इन सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। इससे जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को संभालना आसान होगा और भविष्य में किसी भी जानकारी को आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से दस्तावेजों के गुम होने या छेड़छाड़ की आशंका भी कम होगी।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ आम लोगों को मिलने की उम्मीद है। जमीन या संपत्ति खरीदने वाले लोगों को अब लंबी प्रक्रिया और अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण आवेदन से लेकर दस्तावेजों की जांच तक के काम तेजी से पूरे किए जा सकेंगे।
सरकार का उद्देश्य जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अधिक सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। अक्सर जमीन से जुड़े मामलों में फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद इन समस्याओं पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा पेपरलेस व्यवस्था से निबंधन विभाग के कामकाज में भी सुधार आएगा। कर्मचारियों के लिए रिकॉर्ड को मैनेज करना आसान होगा और पुराने दस्तावेजों को खोजने में लगने वाला समय भी कम होगा।
निबंधन विभाग की ओर से डिजिटल व्यवस्था को सफल बनाने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सभी कार्यालयों में जरूरी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था शुरू होने के बाद लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी होना भी जरूरी होगा। इसके लिए विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है, जिससे आम नागरिक आसानी से इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकें।
राज्य सरकार पहले से ही कई सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री को पेपरलेस बनाना इसी डिजिटल अभियान का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अगस्त से जब यह व्यवस्था पूरे बिहार में लागू होगी तो जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और आसान हो जाएगी। इससे आम लोगों को सुविधा मिलेगी और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
बिहार में जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में 145 निबंधन कार्यालयों में डिजिटल व्यवस्था लागू होने से लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब लोगों की नजर अगस्त में शुरू होने वाली इस नई व्यवस्था पर है, जिससे राज्य में जमीन रजिस्ट्री का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।





