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Bihar: देव सूर्यमंदिर को मिला बड़ा पर्यटन प्रोत्साहन, होमस्टे योजना से ग्रामीणों को होगा फायदा

nidhi
14 July 2026 8:31 AM IST
Bihar: देव सूर्यमंदिर को मिला बड़ा पर्यटन प्रोत्साहन, होमस्टे योजना से ग्रामीणों को होगा फायदा
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देव सूर्यमंदिर के आसपास होमस्टे योजना लागू, स्थानीय लोगों की कमाई बढ़ाने की पहल
Aurangabad (बिहार): बिहार के विश्वप्रसिद्ध देव सूर्यमंदिर को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी होमस्टे योजना में शामिल कर लिया गया है। इस फैसले से न केवल धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है, बल्कि मंदिर के आसपास रहने वाले स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी खुलेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य का अनुभव कराया जाए, जिससे पर्यटन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो सके।
देव सूर्यमंदिर बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित देश के सबसे प्राचीन और आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यह मंदिर विशेष रूप से छठ महापर्व के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन जाता है। हर वर्ष बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां सूर्य भगवान की आराधना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ठहरने की सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए सरकार ने होमस्टे मॉडल को यहां लागू करने का निर्णय लिया है।
क्या है होमस्टे योजना?
होमस्टे योजना के तहत स्थानीय लोग अपने घरों के एक हिस्से को पर्यटकों और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विकसित कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार कमरे, शौचालय, स्वच्छता, पेयजल, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। सरकार और पर्यटन विभाग आवश्यक प्रशिक्षण, पंजीकरण और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएंगे ताकि मेहमानों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पर्यटकों के ठहरने का पैसा सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंचेगा। इससे गांव और कस्बों में रहने वाले लोगों की आमदनी बढ़ेगी तथा उन्हें अपने घर से ही स्वरोजगार का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि होमस्टे योजना केवल आवास तक सीमित नहीं रहेगी। इसके माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन, लोक संस्कृति, परिवहन सेवाएं, गाइड, पूजा सामग्री, स्मृति चिन्ह और छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा।
जब पर्यटक किसी स्थानीय परिवार के घर में ठहरेंगे तो वे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेंगे, आसपास के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी करेंगे। इससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना में शामिल होने वाले परिवारों को अतिथि सत्कार, स्वच्छता, डिजिटल बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान, सुरक्षा मानकों और पर्यटक प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे ग्रामीण परिवार भी आधुनिक पर्यटन सेवाओं के अनुरूप खुद को तैयार कर सकेंगे।
इसके अलावा पंजीकृत होमस्टे को पर्यटन विभाग के प्रचार-प्रसार अभियान और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जाएगा, जिससे देशभर के पर्यटक आसानी से बुकिंग कर सकें।
देव सूर्यमंदिर में छठ पर्व के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इस समय होटल और धर्मशालाओं में जगह की कमी अक्सर देखने को मिलती है। होमस्टे योजना लागू होने से अतिरिक्त आवास सुविधा उपलब्ध होगी और श्रद्धालुओं को बेहतर एवं किफायती ठहरने का विकल्प मिलेगा।
इससे भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी और पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर बिहार की संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
बिहार सरकार लंबे समय से राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। बौद्ध, जैन, सिख और हिंदू धार्मिक स्थलों के विकास के साथ अब होमस्टे जैसी योजनाओं के जरिए पर्यटन को स्थानीय विकास से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
देव सूर्यमंदिर को होमस्टे योजना में शामिल किए जाने से उम्मीद है कि यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होगी। इससे राज्य के पर्यटन राजस्व में बढ़ोतरी के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
लोगों में उत्साह
स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से यहां पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो गांवों में रहने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और युवाओं का पलायन भी कम हो सकता है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देव सूर्यमंदिर मॉडल सफल होता है तो बिहार के अन्य प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी इसी तरह की होमस्टे परियोजनाओं का विस्तार किया जा सकता है।
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