
पटना। बिहार में किसानों और युवा उद्यमियों के लिए तेल प्रसंस्करण के क्षेत्र में कारोबार शुरू करने का बड़ा अवसर सामने आया है। तिलहन प्रसंस्करण एवं तेल निष्कर्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार नई तेल मिल स्थापित करने पर लागत का 33 प्रतिशत या अधिकतम 9.90 लाख रुपये तक अनुदान देगी। इच्छुक और पात्र आवेदक योजना का लाभ लेने के लिए 15 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
यह पहल राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन के तहत शुरू की गई है। इसका प्रमुख उद्देश्य तिलहन फसलों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण सुनिश्चित करना, किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और खाद्य तेल उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। कृषि विभाग की ओर से योजना के तहत आवेदन लिए जा रहे हैं।
सरकार की इस पहल से उन किसानों, किसान समूहों और युवा उद्यमियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं लेकिन शुरुआती पूंजी की कमी के कारण तेल मिल स्थापित नहीं कर पा रहे। मशीनरी, उपकरण और इकाई की स्थापना पर आने वाले खर्च का एक हिस्सा अनुदान के रूप में मिलने से लाभार्थियों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
लागत का 33 प्रतिशत मिलेगा अनुदान
योजना के प्रावधानों के अनुसार नई तेल मिल स्थापित करने वाले पात्र लाभार्थी को परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। हालांकि अनुदान की अधिकतम सीमा 9.90 लाख रुपये तय की गई है। वास्तविक सहायता राशि स्वीकृत परियोजना लागत और विभागीय नियमों के आधार पर निर्धारित होगी।
आवेदकों को तेल मिल की प्रस्तावित परियोजना, मशीनरी, भूमि या कार्यस्थल तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित जानकारी आवेदन में देनी होगी। आवेदन स्वीकृत होने के बाद विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आवेदकों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और अनुदान की शर्तों को सावधानी से पढ़ लें।
इस योजना के तहत नई इकाई लगाने वाले उद्यमियों को सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली, तिल और अन्य तिलहन फसलों से तेल निकालने तथा उसके प्रसंस्करण की सुविधा विकसित करने का अवसर मिलेगा। स्थानीय स्तर पर तेल मिल लगने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर की मंडियों या दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है।
किसानों को मिलेगा स्थानीय बाजार
तेल मिलों की संख्या बढ़ने से तिलहन उत्पादक किसानों के लिए स्थानीय बाजार तैयार होने की संभावना है। अभी कई क्षेत्रों में प्रसंस्करण इकाइयां उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज कच्चे माल के रूप में बेचनी पड़ती है। स्थानीय स्तर पर तेल निष्कर्षण की सुविधा मिलने पर तिलहन का मूल्य संवर्धन होगा और इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
तेल निकालने के बाद बचने वाली खली का उपयोग पशु आहार और जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। इससे तेल मिल संचालकों के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता भी खुल सकता है। इस प्रकार एक तेल मिल केवल खाद्य तेल उत्पादन तक सीमित न रहकर कृषि और पशुपालन से जुड़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकती है।
छोटी प्रसंस्करण इकाइयां गांवों और कस्बों में स्थापित होने से परिवहन लागत कम हो सकती है। स्थानीय व्यापारियों, किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क बनने से कृषि उपज की खरीद और प्रसंस्करण की प्रक्रिया भी आसान होगी।
युवाओं के लिए स्वरोजगार का अवसर
योजना से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। तेल मिल की स्थापना के बाद मशीन संचालन, पैकेजिंग, परिवहन, भंडारण और बिक्री जैसे कार्यों के लिए स्थानीय लोगों की जरूरत होगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार सृजित हो सकते हैं।
युवा उद्यमी स्थानीय स्तर पर तैयार खाद्य तेल को पैक करके अपना ब्रांड भी विकसित कर सकते हैं। बाजार की मांग, गुणवत्ता मानकों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करते हुए कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इकाई शुरू करने से पहले आवेदकों को परियोजना की व्यावहारिकता, कच्चे माल की उपलब्धता और स्थानीय बाजार का आकलन करना आवश्यक होगा।
15 सितंबर आवेदन की अंतिम तारीख
योजना का लाभ उठाने के इच्छुक आवेदकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर निर्धारित की गई है। समयसीमा निकट होने के कारण पात्र किसानों और उद्यमियों को आवेदन प्रक्रिया जल्द पूरी करनी होगी। आवेदन में त्रुटि या अधूरे दस्तावेज होने पर परेशानी हो सकती है, इसलिए सभी जानकारियों का मिलान करने के बाद ही फॉर्म जमा करना उचित होगा।
आवेदकों को केवल आधिकारिक विभागीय पोर्टल पर आवेदन करना चाहिए। किसी एजेंट या अनधिकृत व्यक्ति को भुगतान करने से बचना जरूरी है। योजना की विस्तृत पात्रता, चयन प्रक्रिया, स्वीकृत मशीनरी और भुगतान संबंधी नियम कृषि विभाग की आधिकारिक सूचना से जांचने चाहिए।
तेल मिल स्थापित करने के इच्छुक लोगों के लिए अनुदान योजना आर्थिक सहायता के साथ अपना कारोबार शुरू करने का अवसर दे रही है। यदि इसका क्रियान्वयन पारदर्शी तरीके से किया जाता है तो इससे तिलहन प्रसंस्करण क्षमता बढ़ने, किसानों की आय में सुधार और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने में मदद मिल सकती है। योजना की राशि और आवेदन की समयसीमा की जानकारी प्रकाशित रिपोर्टों में भी दी गई है।





