बिहार

ब्रिक्स में निमंत्रण नहीं मिलने पर तेजस्वी ने कसा तंज

Kavita2
13 Sept 2026 3:54 PM IST
ब्रिक्स में निमंत्रण नहीं मिलने पर तेजस्वी ने कसा तंज
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पटना। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर बिहार में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए कहा कि शायद उन्हें इस डर से सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया गया कि वह वहां पहुंचकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ही ‘व्याकुल मत हो’ न कह दें। तेजस्वी यादव ने यह टिप्पणी रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की।

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के विधानसभा में दिए गए एक पुराने बयान का उल्लेख करते हुए यह व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि जब सम्राट चौधरी मंत्री रहते हुए विधानसभा अध्यक्ष से इस प्रकार की बात कह सकते हैं तो ब्रिक्स सम्मेलन में जाकर भी कुछ ऐसा ही बोल सकते थे। उनका यह बयान पूरी तरह राजनीतिक कटाक्ष के रूप में सामने आया है।

नेता प्रतिपक्ष ने ब्रिक्स सम्मेलन में मुख्यमंत्री को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाया। हालांकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन राष्ट्राध्यक्षों, सरकार प्रमुखों और संबंधित प्रतिनिधिमंडलों का अंतरराष्ट्रीय आयोजन था। तेजस्वी ने इसी विषय को मुख्यमंत्री पर हमला करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। उनकी टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी टकराव बढ़ने की संभावना है।

तेजस्वी यादव का ‘व्याकुल मत हो’ वाला तंज सम्राट चौधरी की उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसका उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उल्लेख किया। नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, मंत्री पद पर रहते हुए सम्राट चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित करते समय ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। तेजस्वी ने उसी प्रसंग को ब्रिक्स सम्मेलन और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से जोड़कर मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाने की कोशिश की।

ब्रिक्स सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक, बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन का उल्लेख करते हुए तेजस्वी यादव ने प्रदेश की राजनीति से जोड़कर मुख्यमंत्री पर व्यंग्य किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष का हमला केवल ब्रिक्स सम्मेलन और मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने राज्य में बाढ़ की स्थिति, सीतामढ़ी में राष्ट्रीय जनता दल के जिला उपाध्यक्ष की हत्या और सरकार की कार्यशैली से जुड़े विषय भी उठाए। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनहित से जुड़ी समस्याओं का प्रभावी समाधान करने में सफल नहीं हो रही है।

उन्होंने बाढ़ की स्थिति को लेकर सरकार की तैयारियों और राहत व्यवस्था पर सवाल उठाए। तेजस्वी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को समय पर सहायता पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ से परेशान परिवारों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से उनके इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई।

नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री, सुरक्षित आवास, भोजन और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि बाढ़ केवल प्राकृतिक संकट नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति में प्रशासनिक तैयारियों की भी परीक्षा होती है। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी होनी चाहिए।

तेजस्वी यादव ने सीतामढ़ी में राजद के जिला उपाध्यक्ष की हत्या का मुद्दा उठाते हुए कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने घटना पर चिंता जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में आपराधिक घटनाओं के कारण आम लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

हत्या के मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता और घटना की परिस्थितियां जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होंगी। तेजस्वी यादव ने सरकार से मामले को गंभीरता से लेने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता या आम नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन का दायित्व है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी ने राज्य सरकार की कार्यशैली को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष बाढ़, कानून-व्यवस्था, रोजगार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा। उनके मुताबिक, सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर किया गया उनका कटाक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे चर्चित हिस्सा रहा। ‘व्याकुल मत हो’ वाले बयान को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से जोड़कर राजनीतिक व्यंग्य का रूप दिया। तेजस्वी का इशारा था कि सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में संयम रखना चाहिए, क्योंकि उनके वक्तव्यों का व्यापक असर पड़ता है।

राजनीतिक रूप से इस बयान को विपक्ष की उस रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सरकार के शीर्ष नेतृत्व को सीधे निशाने पर लिया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत कटाक्ष करने के साथ बाढ़ और कानून-व्यवस्था जैसे जनहित के विषयों को भी अपने संबोधन में शामिल किया। इससे उन्होंने सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर दबाव बनाने की कोशिश की।

ब्रिक्स सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें विश्व के कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया और साझा घोषणा पर सहमति बनाई। सम्मेलन में वैश्विक स्थिरता, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े विषय प्रमुख रहे। मंच पर तकनीक, आपूर्ति शृंखला, एआई और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

तेजस्वी यादव के आरोपों और कटाक्ष पर मुख्यमंत्री या सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से क्या जवाब आता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। फिलहाल उनके बयान ने ब्रिक्स सम्मेलन को प्रदेश की सियासत से जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में बाढ़, हत्या और सरकार की कार्यशैली को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।

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