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ब्रिक्स सहयोग मजबूत करने के लिए शी जिनपिंग ने पेश कीं पांच पहल

नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को अधिक मजबूत बनाने के लिए पांच नई पहल पेश की हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार एवं निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिभा विकास को प्राथमिकता दी गई है। शी ने ये प्रस्ताव भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए रखे।
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप आपसी साझेदारी का दायरा बढ़ाने का आह्वान किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि सदस्य देश नई तकनीक, उद्योग और मानव संसाधन विकास के क्षेत्रों में एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाएं।
President Xi Jinping attended Session II of the 18th BRICS Summit and delivered an important statement.
— Xu Feihong (@China_Amb_India) September 13, 2026
President Xi proposed five initiatives for deepening BRICS cooperation:
1️⃣ The open source and inclusive AI initiative.
China will be a pioneer in establishing a BRICS AI… pic.twitter.com/vkrgElHs7m
शी जिनपिंग की पहली पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से संबंधित है। एआई अब उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्त और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। चीन ने ब्रिक्स देशों के बीच एआई आधारित नवाचार, अनुसंधान और उपयोग के अनुभव साझा करने पर जोर दिया। इसके माध्यम से सदस्य देशों को तकनीकी प्रगति के नए अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई।
एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ उसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग से जुड़े प्रश्न भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग से तकनीकी मानकों, नवाचार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों पर साझा समझ बनाने में मदद मिल सकती है। शी की पहल का उद्देश्य सदस्य देशों को एआई क्रांति में सक्रिय भागीदार बनाना और उसके लाभ को व्यापक स्तर तक पहुंचाना बताया गया है।
दूसरी पहल व्यापार और निवेश से जुड़ी है। ब्रिक्स समूह में दुनिया की कई बड़ी एवं उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने, निवेश को आसान बनाने और कारोबारी संपर्क बढ़ाने से आर्थिक साझेदारी को नई गति मिल सकती है। शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के बीच बाजारों को जोड़ने और परस्पर निवेश के लिए बेहतर माहौल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक तनाव के बीच ब्रिक्स देशों का आपसी सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदस्य देश यदि व्यापार और निवेश के लिए सरल प्रक्रियाएं विकसित करते हैं तो उद्योगों तथा कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने और आर्थिक विकास की गति बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
तीसरी पहल डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास पर केंद्रित है। डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, ऑनलाइन सेवाएं और डेटा आधारित कारोबार आधुनिक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं। शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों को डिजिटल परिवर्तन की दिशा में मिलकर आगे बढ़ने और अपने अनुभवों को साझा करने का सुझाव दिया।
डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग से छोटे और मध्यम व्यवसायों को बड़े बाजारों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही नागरिकों के लिए वित्तीय, शैक्षणिक और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। हालांकि डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और डिजिटल असमानता जैसे विषयों पर सदस्य देशों के बीच समन्वय की आवश्यकता भी रहेगी।
चौथी पहल स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से संबंधित है। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग में एआई, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इन तकनीकों के माध्यम से उत्पादन को अधिक कुशल, तेज और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है। शी ने ब्रिक्स देशों से आधुनिक विनिर्माण तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
ब्रिक्स देशों में औद्योगिक विकास की स्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में तकनीक और अनुभव साझा करने से सदस्य देशों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर सहयोग का असर केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छोटे उद्योगों और स्टार्टअप को भी आधुनिक तकनीक अपनाने का अवसर मिल सकता है।
पांचवीं पहल विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रतिभा विकास से संबंधित है। शी जिनपिंग ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने की जरूरत बताई। प्रतिभा विकास के लिए ब्रिक्स देशों के शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के बीच सहयोग, प्रशिक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
विज्ञान और तकनीक में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण, शोध और शैक्षणिक संपर्क से युवाओं को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे सदस्य देशों की अपनी तकनीकी क्षमता मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
भारत में चीनी दूतावास के आधिकारिक वक्तव्यों में पहले भी डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, नए औद्योगीकरण और ‘एआई प्लस’ सहयोग के विस्तार पर जोर दिया गया है। इन क्षेत्रों में सहयोग को ब्रिक्स साझेदारी के भविष्य से जोड़ा जा रहा है। डिजिटल और औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी सदस्य देशों के विकास को गति दे सकती है।
शी जिनपिंग की पांच पहलों में तकनीक, कारोबार, उद्योग और मानव संसाधन को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था नई तकनीकी व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि व्यापार और निवेश आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देते हैं। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों को आधुनिक बनाने में सहायक हो सकती है और प्रतिभा विकास इन सभी क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध करा सकता है।
इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच विस्तृत बातचीत, साझा कार्ययोजना और संस्थागत व्यवस्था की जरूरत होगी। सम्मेलन में पेश की गई पहलें सहयोग की दिशा तय करती हैं, लेकिन उनका वास्तविक प्रभाव सदस्य देशों द्वारा उठाए जाने वाले व्यावहारिक कदमों पर निर्भर करेगा। शी जिनपिंग ने इन पांच क्षेत्रों के माध्यम से ब्रिक्स सहयोग को अधिक परिणामोन्मुख बनाने और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में समूह की भूमिका मजबूत करने का संदेश दिया है।





