बिहार

रील के चक्कर में ट्रेनों पर पत्थरबाजी 5 दिन में 134 गिरफ्तार

nidhi
5 Sept 2026 7:56 AM IST
रील के चक्कर में ट्रेनों पर पत्थरबाजी 5 दिन में 134 गिरफ्तार
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वंदे भारत बनी रीलबाजों का निशाना 12 जिले बने हॉटस्पॉट

पटना: बिहार में चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी के मामलों को लेकर रेलवे और पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। पुलिस मुख्यालय की समीक्षा में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पकड़े गए कई आरोपियों ने सोशल मीडिया पर फेसबुक-इंस्टाग्राम रील बनाने और दोस्तों के साथ मनोरंजन के लिए ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की बात स्वीकार की है। घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान में महज पांच दिनों के भीतर 134 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 34 नाबालिग भी शामिल हैं।

बिहार के 12 जिले बने हॉटस्पॉट
बिहार पुलिस मुख्यालय ने ट्रेनों पर ईंट-पत्थर फेंकने की ज्यादा घटनाओं वाले 12 जिलों को हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। इनमें पटना, भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, बेतिया, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, सारण, गया, वैशाली और नवादा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक और पत्थरबाजी की आशंका वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। एडीजी रेल के निर्देश पर पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। आरपीएफ और जीआरपी की टीमें संवेदनशील स्थानों की पहचान करने के साथ आरोपियों को पकड़ने में जुटी हैं।
वंदे भारत जैसी ट्रेनों को बना रहे निशाना
पुलिस की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक उपद्रवी खासकर वंदे भारत एक्सप्रेस, तेजस और जनशताब्दी जैसी ट्रेनों को निशाना बना रहे हैं। पत्थर फेंकने से ट्रेन के शीशे टूटने के साथ यात्रियों को गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है। रेलवे संपत्ति को भी भारी नुकसान हो सकता है। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में करीब 68 प्रतिशत की पहचान वंदे भारत जैसी ट्रेनों में लगे कैमरों की मदद से हुई। आधुनिक ट्रेनों में लगे कैमरे अब ऐसे उपद्रवियों की पहचान करने में पुलिस और रेलवे के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
रील और मनोरंजन के लिए फेंके पत्थर
गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में सबसे चौंकाने वाला पहलू पत्थरबाजी की वजह को लेकर सामने आया। पुलिस समीक्षा के अनुसार अधिकांश आरोपियों ने रील बनाने और दोस्तों के साथ मनोरंजन के दौरान ऐसा करने की बात कही। सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने के चक्कर में किया गया यह काम ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पत्थरबाजी की सबसे ज्यादा घटनाएं अप्रैल में दर्ज की गईं। सप्ताह के दिनों के लिहाज से गुरुवार तथा शनिवार-रविवार को ऐसी घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक सामने आई हैं।
34 नाबालिग भी पकड़े गए
विशेष अभियान के शुरुआती पांच दिनों में गिरफ्तार 134 लोगों में 34 नाबालिग हैं। नाबालिगों की इतनी बड़ी संख्या सामने आने के बाद रेलवे और पुलिस ने कार्रवाई के साथ जागरूकता पर भी जोर दिया है। संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों और स्थानीय लोगों को बताया जा रहा है कि ट्रेन पर पत्थर फेंकना मजाक या मनोरंजन नहीं बल्कि गंभीर अपराध है। आरपीएफ और जीआरपी की ओर से चिह्नित इलाकों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में डालने के कानूनी परिणामों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
तीन से सात साल तक की सजा का प्रावधान
रिपोर्ट के अनुसार पकड़े गए आरोपियों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और रेल यात्रियों की जान-माल को खतरे में डालने से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। ऐसे मामलों में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत तीन से सात वर्ष तक की सजा हो सकती है। पुलिस और रेलवे का फोकस अब केवल घटना के बाद आरोपी को पकड़ने पर नहीं बल्कि संवेदनशील जगहों की पहचान कर पत्थरबाजी रोकने पर भी है। कैमरों और स्थानीय स्तर की सूचनाओं के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। बिहार में चलाया जा रहा विशेष अभियान सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट या रील बनाने वालों के लिए स्पष्ट चेतावनी है। ट्रेन पर फेंका गया एक पत्थर किसी यात्री को गंभीर रूप से घायल कर सकता है और बड़ी दुर्घटना का कारण भी बन सकता है। पांच दिनों में 134 गिरफ्तारियां बताती हैं कि पुलिस और रेलवे ने अब इस तरह की घटनाओं के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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