बिहार

Bihar में 44 भूखंडों पर पत्थर खनन को मंजूरी

Kavita2
12 July 2026 9:21 AM IST
Bihar में 44 भूखंडों पर पत्थर खनन को मंजूरी
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पटना : बिहार सरकार ने राज्य में खनिज संसाधनों के व्यवस्थित दोहन और निर्माण कार्यों के लिए पत्थर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने छह जिलों के कुल 44 भूखंडों पर पत्थर खनन की मंजूरी प्रदान कर दी है। इन भूखंडों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत खनन गतिविधियां संचालित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से निर्माण क्षेत्र को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध होगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

सरकारी जानकारी के अनुसार, जिन छह जिलों में पत्थर खनन की अनुमति दी गई है उनमें नवादा, शेखपुरा, गया, रोहतास, औरंगाबाद और बांका शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 17 भूखंड नवादा जिले में चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा शेखपुरा में 10, गया में नौ, रोहतास में चार, औरंगाबाद में तीन तथा बांका जिले में एक भूखंड पर पत्थर खनन की अनुमति दी गई है।

खनन की मंजूरी जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट-डीएसआर) के आधार पर दी गई है। डीएसआर में संबंधित क्षेत्रों के भूगर्भीय संसाधनों, पर्यावरणीय प्रभाव, खनिज भंडार, जल स्रोतों, वन क्षेत्र तथा स्थानीय परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाता है कि किसी क्षेत्र में खनन गतिविधियां पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालित की जा सकती हैं या नहीं।

डीएसआर रिपोर्ट का परीक्षण किए जाने के बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने संबंधित भूखंडों के लिए अनापत्ति (एनओसी) प्रदान कर दी है। आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद अब इन भूखंडों पर आगे की नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर खनन पट्टों का आवंटन किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि राज्य में सड़क, पुल, भवन, औद्योगिक परियोजनाओं और अन्य आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में पत्थर और गिट्टी की आवश्यकता होती है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त खनन होने से निर्माण सामग्री की उपलब्धता बेहतर होगी और बाहरी राज्यों पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सभी भूखंडों पर खनन गतिविधियां निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय शर्तों का पालन करते हुए ही संचालित की जाएंगी। खनन कार्य के दौरान पर्यावरण संरक्षण, धूल नियंत्रण, जल स्रोतों की सुरक्षा, श्रमिकों की सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से खनन किया जाए तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। खदानों के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही परिवहन, मशीनरी, निर्माण सामग्री और अन्य सहायक गतिविधियों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

राज्य सरकार लंबे समय से अवैध खनन पर रोक लगाने और खनिज संसाधनों के पारदर्शी प्रबंधन पर जोर दे रही है। इसी नीति के तहत अधिकृत क्षेत्रों में ही खनन की अनुमति दी जा रही है ताकि अवैध उत्खनन पर नियंत्रण रखा जा सके और सरकार को मिलने वाले राजस्व में वृद्धि हो।

खनन पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी। इच्छुक कंपनियों या पात्र आवेदकों को तय प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा और सभी कानूनी एवं पर्यावरणीय शर्तों का पालन करना होगा। इसके बाद ही उन्हें खनन कार्य शुरू करने की अनुमति मिलेगी।

नवादा जिले में सबसे अधिक 17 भूखंड चिन्हित होने से वहां खनन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसी प्रकार शेखपुरा और गया जिले में भी पर्याप्त संख्या में भूखंडों को स्वीकृति मिलने से स्थानीय निर्माण उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनिज संसाधनों का दोहन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए किया जाएगा। सभी संबंधित विभाग समय-समय पर खनन गतिविधियों की निगरानी करेंगे ताकि नियमों का उल्लंघन न हो और पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।

बिहार सरकार का मानना है कि इस निर्णय से राज्य में आधारभूत संरचना परियोजनाओं को गति मिलेगी, निर्माण सामग्री की आपूर्ति बेहतर होगी, स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और खनिज क्षेत्र से राज्य के राजस्व में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी। आने वाले समय में आवश्यकता और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अन्य क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद खनन संबंधी निर्णय लिए जा सकते हैं।

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