बिहार

फल्गु-निरंजना के पुनर्जीवन को रफ्तार, पहले चरण का जिम्मा एनएचएआई को

Kavita2
21 Aug 2026 4:42 PM IST
फल्गु-निरंजना के पुनर्जीवन को रफ्तार, पहले चरण का जिम्मा एनएचएआई को
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नई दिल्ली/गया। ऐतिहासिक फल्गु-निरंजना नदी को उसके उद्गम स्थल झारखंड के चतरा जिले स्थित बेलगड्डा से लेकर गया होते हुए गंगा के संगम तक अविरल और बारहमासी बनाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हुई है। नदी के पुनर्जीवन और इसके जल प्रवाह को सालभर बनाए रखने को लेकर 20 अगस्त को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। इसमें केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में फल्गु-निरंजना नदी के पुनर्जीवन के लिए प्रस्तावित कार्यों और उन्हें जमीन पर उतारने की रणनीति पर विचार किया गया।

नदी के पुराने स्वरूप को लौटाने की कोशिश

फल्गु-निरंजना नदी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व काफी पुराना है। विशेष रूप से गया में इस नदी का संबंध धार्मिक अनुष्ठानों और पिंडदान की परंपरा से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से नदी के कई हिस्सों में पानी की कमी और मौसमी प्रवाह को लेकर चिंता जताई जाती रही है।

नदी को बारहमासी बनाने की प्रस्तावित योजना का उद्देश्य इसके सूख चुके हिस्सों में जल प्रवाह को बहाल करना और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को मजबूत करना है। इसके लिए नदी के तल में जमा गाद और मिट्टी को हटाने समेत कई काम किए जाने प्रस्तावित हैं।

जीतन राम मांझी के प्रयास से हुई बैठक

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के प्रयासों से इस परियोजना को लेकर केंद्र स्तर पर बैठक आयोजित की गई। बैठक में नदी के पुनर्जीवन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया।

माना जा रहा है कि परियोजना के क्रियान्वयन से झारखंड और बिहार के उन क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है, जहां से फल्गु-निरंजना नदी का प्रवाह गुजरता है।

एनएचएआई को मिलेगी पहले चरण की जिम्मेदारी

बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि बिहार और झारखंड सरकारों से आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई परियोजना के पहले चरण का काम संभालेगा।

इससे परियोजना को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा स्पष्ट हुई है। राज्य सरकारों से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद पहले चरण में नदी के उन हिस्सों पर काम शुरू किया जाएगा, जहां जल प्रवाह बाधित या पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

सूखे हिस्सों में होगी डीसिल्टिंग

परियोजना के शुरुआती चरण में नदी के सूख चुके हिस्सों की डीसिल्टिंग यानी गाद निकालने और मिट्टी की खुदाई का काम किया जाएगा। नदी के तल में लंबे समय से जमा गाद और मिट्टी के कारण जल प्रवाह बाधित होने की स्थिति में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रस्तावित कार्यों के जरिए नदी के पुराने प्रवाह मार्ग को व्यवस्थित करने और जल के प्राकृतिक आवागमन के लिए आवश्यक स्थान तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि परियोजना के विस्तृत तकनीकी स्वरूप और कार्य की समयसीमा से जुड़ी जानकारी आगे की मंजूरियों और अध्ययन के बाद स्पष्ट होगी।

झारखंड से बिहार तक जुड़ेगा प्रयास

फल्गु-निरंजना नदी के पुनर्जीवन की योजना का दायरा केवल गया तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित योजना नदी के उद्गम स्थल चतरा जिले के बेलगड्डा से शुरू होकर गया होते हुए गंगा संगम तक नदी के प्रवाह को बेहतर बनाने से जुड़ी है।

इस वजह से परियोजना के लिए बिहार और झारखंड दोनों राज्यों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। राज्य सरकारों से अनुमति और एनओसी हासिल करना शुरुआती महत्वपूर्ण चरणों में शामिल है।

धार्मिक और पर्यटन महत्व भी

गया में फल्गु नदी का धार्मिक महत्व देशभर में प्रसिद्ध है। पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं और फल्गु नदी के तट पर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। नदी में पर्याप्त और निरंतर जल उपलब्ध होने से धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ क्षेत्र के पर्यटन को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

फल्गु-निरंजना को अविरल बनाने की योजना नदी से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पर्यावरणीय पहलुओं पर भी होगा ध्यान

नदी पुनर्जीवन परियोजना में पर्यावरणीय पहलुओं को भी महत्वपूर्ण माना गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में नदी के पुनर्जीवन से जुड़े पर्यावरणीय विषयों पर चर्चा हुई।

नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि परियोजना के दौरान पर्यावरण और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके लिए संबंधित विभागों की मंजूरी और तकनीकी अध्ययन अहम होंगे।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

अब परियोजना के अगले चरण के लिए बिहार और झारखंड सरकारों की ओर से आवश्यक अनुमति और एनओसी का इंतजार रहेगा। मंजूरी मिलने के बाद एनएचएआई पहले चरण के काम को आगे बढ़ाएगा।

नदी के सूखे हिस्सों की पहचान, डीसिल्टिंग, मिट्टी की खुदाई और जल प्रवाह को बेहतर बनाने से संबंधित कार्यों की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम होगा।

फल्गु-निरंजना नदी को उद्गम स्थल से गंगा संगम तक अविरल और बारहमासी बनाने की पहल नदी के पुनर्जीवन के साथ बिहार और झारखंड की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 20 अगस्त की उच्चस्तरीय बैठक के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी और शुरुआती कार्यों का खाका सामने आया है। अब दोनों राज्यों की मंजूरियों के बाद पहले चरण के काम शुरू होने की उम्मीद है।

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