
Bihar बिहार: पूर्व रेलवे के अंतर्गत आने वाले प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल जमालपुर रेलवे मुख्य अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सेवानिवृत्त रेलकर्मियों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। लंबे समय तक रेलवे सेवा देने वाले बुजुर्ग कर्मचारियों का कहना है कि अब उन्हें अपने ही अस्पताल में इलाज और दवाइयों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सेवानिवृत्त रेलकर्मियों ने आरोप लगाया है कि 35 से 40 वर्षों तक रेलवे को अपनी सेवाएं देने के बाद भी उन्हें बुढ़ापे में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। अस्पताल में दवाइयों के वितरण से लेकर डॉक्टरों की उपलब्धता तक कई स्तरों पर अव्यवस्था बनी हुई है।
अस्पताल पहुंचे पूर्व रेलकर्मी राम रतन सिंह, संजय कुमार, रामचंद्र सिंह, शत्रुघ्न प्रसाद, योगेंद्र प्रसाद और कमल पासवान सहित कई लोगों ने अपनी समस्याएं सामने रखते हुए कहा कि 205 बेड क्षमता वाला यह बड़ा अस्पताल होने के बावजूद कई बेड अक्सर खाली पड़े रहते हैं, लेकिन सुविधाओं का लाभ मरीजों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।
उनका कहना है कि सबसे बड़ी समस्या विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे बड़े शहरों में रेफर कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में मरीजों को पटना या कोलकाता भेजा जाता है, जिससे न केवल इलाज में देरी होती है बल्कि मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है।
पूर्व रेलकर्मियों ने बताया कि रेफरल व्यवस्था के कारण कई बार आपात स्थिति में भी समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे मरीजों की स्थिति और गंभीर हो जाती है। उनका कहना है कि रेलवे कर्मचारियों के लिए बने इस अस्पताल की स्थिति चिंताजनक है और तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
अस्पताल की दवा वितरण प्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई गई है। बुजुर्ग मरीजों का कहना है कि उन्हें दवाएं लेने के लिए लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, जो उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए बेहद कठिन है।
रेलवे स्वास्थ्य सेवा से जुड़े अधिकारियों से पूर्व रेलकर्मियों ने मांग की है कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति बढ़ाई जाए, दवा वितरण प्रणाली को डिजिटल और सरल बनाया जाए तथा रेफरल प्रक्रिया को बेहतर किया जाए।
स्थानीय स्तर पर भी यह मुद्दा चर्चा में है कि एक बड़े रेलवे अस्पताल में यदि बुनियादी सुविधाएं कमजोर होंगी तो इसका सीधा असर हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। कई लोगों ने इसे सेवा के बाद की अनदेखी बताया है।
पूर्व रेलकर्मियों का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन रेलवे सेवा में लगा दिया, लेकिन अब स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
कुल मिलाकर, जमालपुर रेलवे मुख्य अस्पताल की मौजूदा स्थिति ने सेवानिवृत्त रेलकर्मियों की समस्याओं को उजागर कर दिया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और दवा वितरण प्रणाली की अव्यवस्था प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई है।





