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राशन कार्ड की राह में रोड़ा बना जातीय प्रमाणपत्र
छपरा : राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में जातीय प्रमाणपत्र (Caste Certificate) की अनिवार्यता कई महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। विवाह के बाद ससुराल में रहने वाली महिलाओं को नया राशन कार्ड बनवाने या परिवार के राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के दौरान जातीय प्रमाणपत्र जमा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण उन्हें बार-बार अपने मायके के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
महिलाओं का कहना है कि शादी के बाद उनका स्थायी निवास बदल जाता है, लेकिन जातीय प्रमाणपत्र अक्सर मायके के पते या वहां के रिकॉर्ड से जुड़ा होने के कारण नया प्रमाणपत्र बनवाने या पुराने दस्तावेज़ प्राप्त करने में समय और अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
जातीय प्रमाणपत्र बना बड़ी बाधा
राशन कार्ड के लिए आवेदन करते समय कई मामलों में जातीय प्रमाणपत्र मांगा जा रहा है। जिन महिलाओं के पास यह दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है या पुराने पते पर बना हुआ है, उन्हें पहले इसे अपडेट कराने या नया प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
मायके के लगाने पड़ रहे चक्कर
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का कहना है कि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उन्हें बार-बार अपने मायके जाना पड़ता है। कई बार स्थानीय स्तर पर आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने या दस्तावेजों के सत्यापन में देरी के कारण आवेदन प्रक्रिया लंबी हो जाती है।
समय और खर्च दोनों बढ़े
दस्तावेज़ों की कमी के कारण महिलाओं को कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि यात्रा और अन्य खर्च भी बढ़ जाते हैं।
प्रशासन से प्रक्रिया आसान बनाने की मांग
लोगों का कहना है कि यदि विभिन्न सरकारी विभागों के रिकॉर्ड आपस में डिजिटल रूप से जुड़े हों या पहले से उपलब्ध दस्तावेज़ों का सत्यापन ऑनलाइन किया जाए, तो महिलाओं को बार-बार नए प्रमाणपत्र लाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी तेज और सरल हो सकती है।
क्या करें आवेदक?
आवेदन से पहले आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची की जांच करें।
जातीय प्रमाणपत्र और पहचान संबंधी दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें।
यदि दस्तावेज़ में त्रुटि हो, तो संबंधित कार्यालय में समय रहते सुधार के लिए आवेदन करें।
आवेदन की स्थिति की नियमित जानकारी लेते रहें।
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