बिहार

मुंगेर के कार्यपालक अभियंता नारद दास के ठिकानों पर छापेमारी, चार बैंक खातों में मिले 17.15 लाख

Kavita2
9 Oct 2026 9:27 AM IST
मुंगेर के कार्यपालक अभियंता नारद दास के ठिकानों पर छापेमारी, चार बैंक खातों में मिले 17.15 लाख
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बिहार। आर्थिक अपराध इकाई ने मुंगेर स्थित स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन में तैनात कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। छापेमारी के दौरान उनके विभिन्न बैंकों में संचालित चार खातों में कुल 17 लाख 15 हजार 688 रुपये की राशि मिलने की जानकारी सामने आई है। आर्थिक अपराध इकाई ने इन बैंक खातों में मौजूद राशि को फ्रीज करा दिया है। मामले में संपत्ति और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

इस प्रकरण में एक और अहम पहलू सामने आया है। आरोप है कि कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास ने अपनी कथित काली कमाई से अपनी सास को भी आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाया। इस मामले को लेकर अब जांच एजेंसी संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित वित्तीय विवरणों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, संपत्ति के वास्तविक मूल्य और कथित आय के स्रोतों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

चार बैंक खातों में मिली 17.15 लाख रुपये की राशि

आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी के दौरान कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास के विभिन्न बैंकों में संचालित चार खातों की जानकारी सामने आई। इन खातों में कुल 17,15,688 रुपये की राशि मिली है। जांच एजेंसी ने संबंधित खातों में मौजूद राशि को फ्रीज करा दिया है, ताकि जांच के दौरान उस रकम का लेनदेन नहीं किया जा सके।

बैंक खातों में मिली रकम के साथ-साथ अब एजेंसी वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य खातों में जमा राशि के स्रोत और संबंधित वित्तीय गतिविधियों की जानकारी जुटाना है। बैंक खातों में मिली रकम मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चारों बैंक खातों में अलग-अलग कितनी राशि जमा थी या इनमें रकम किस अवधि के दौरान जमा की गई थी। इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद सामने आ सकता है।

दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति का मूल्यांकन शुरू

छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक अपराध इकाई ने संपत्तियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों में दर्ज संपत्तियों और उनसे जुड़े वित्तीय विवरणों की जांच की जा रही है।

संपत्ति का मूल्यांकन किसी भी आर्थिक अपराध से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे जांच एजेंसी को संबंधित संपत्तियों के बारे में उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान करने और उनकी अनुमानित कीमत का आकलन करने में मदद मिलती है। नारद कुमार दास के मामले में भी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति के मूल्यांकन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

फिलहाल, संपत्तियों की कुल संख्या, उनका वास्तविक बाजार मूल्य और मूल्यांकन की प्रक्रिया में सामने आए अन्य विवरणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। जांच एजेंसी की ओर से इन पहलुओं की पड़ताल किए जाने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

सास को भी लाभ पहुंचाने का आरोप

इस मामले में कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास पर अपनी कथित काली कमाई से अपनी सास को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने का आरोप भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपनी सास को मालामाल कर दिया। हालांकि, इस आरोप से संबंधित संपत्ति का मूल्य, लेनदेन का तरीका और रकम के स्रोत के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

आर्थिक अपराध इकाई की जांच में संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इनकी पड़ताल के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि कथित तौर पर सास को किस प्रकार आर्थिक लाभ पहुंचाया गया और संबंधित संपत्ति या धन का स्रोत क्या था।

किसी व्यक्ति के नाम पर संपत्ति होने मात्र से उसकी अवैधता साबित नहीं होती। ऐसे में इस मामले में भी संपत्ति के स्रोत और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पुष्टि जांच के आधार पर ही होगी। फिलहाल, सास को कथित रूप से लाभ पहुंचाने का पहलू मामले में जांच के दायरे से जुड़ा हुआ है।

वित्तीय रिकॉर्ड की जांच पर टिकी नजर

आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई के बाद अब मामले में संपत्तियों के मूल्यांकन और बैंक खातों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। चार खातों में मिली 17,15,688 रुपये की राशि फ्रीज कराई जा चुकी है। इसके अलावा, छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों का मूल्यांकन शुरू किया गया है।

जांच एजेंसी को अब संबंधित दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संपत्तियों के विवरण के आधार पर मामले से जुड़े वित्तीय तथ्यों की पुष्टि करनी है। संपत्तियों की वास्तविक कीमत और उनकी खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत का पता लगाना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा।

फिलहाल, नारद कुमार दास के ठिकानों पर छापेमारी के बाद आर्थिक अपराध इकाई की जांच जारी है। बैंक खातों में मिली रकम को फ्रीज करने और दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होने से मामले में वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल तेज हो गई है। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही कथित अवैध कमाई, संपत्तियों और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

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