
Bihar: रोहतास जिले के सासाराम स्थित सदर अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस की अवैध पार्किंग और दलालों की सक्रियता पर प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। अस्पताल परिसर में रोजाना निजी एंबुलेंस खड़ी नजर आती हैं और ट्रॉमा सेंटर के आसपास उनके चालक व कथित दलाल सक्रिय रहते हैं।
जानकारी के अनुसार, सड़क दुर्घटना या गंभीर बीमारी के मरीजों को पहले सदर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लाया जाता है। प्राथमिक उपचार के बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें पटना या वाराणसी जैसे उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है। पटना के लिए सरकारी एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है, लेकिन वाराणसी के लिए कोई सरकारी एंबुलेंस व्यवस्था नहीं होने के कारण परिजन मजबूर होकर निजी एंबुलेंस का सहारा लेते हैं।
आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर निजी एंबुलेंस चालक और दलाल मरीजों के परिजनों से संपर्क करते हैं और उन्हें जल्द इलाज व बेहतर सुविधा का भरोसा देकर निजी अस्पतालों की ओर ले जाते हैं। कई मामलों में मरीजों को ऐसे अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है, जहां से एंबुलेंस चालकों को कमीशन मिलता है, जिससे परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
लगभग दो महीने पहले एसडीएम डॉ. नेहा कुमारी ने अस्पताल का निरीक्षण कर परिसर में निजी एंबुलेंस की पार्किंग पर रोक लगाने का आदेश दिया था। बावजूद इसके स्थिति में सुधार नहीं हुआ और एंबुलेंस का संचालन जारी है।
एसडीएम ने कहा कि मरीजों के परिजन अपनी इच्छा से वाराणसी इलाज के लिए जाते हैं, जहां सरकारी एंबुलेंस सुविधा नहीं है, इसलिए निजी एंबुलेंस का उपयोग होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दलाली या शोषण की शिकायत मिलती है तो सिविल सर्जन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं, सदर अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक अजय कुमार ने बताया कि इस मामले में एक बार फिर एसडीएम को पत्र भेजा गया है और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। उनका कहना है कि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा और आर्थिक शोषण से बचाने के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंस और दलालों की गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस बार क्या सख्त कदम उठाता है।





