
बिहार: दरभंगा जिले में निर्माणाधीन रामनगर-रोसड़ा (एनएच-527ई) ग्रीनफील्ड सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बेहतर और सुरक्षित सफर का सपना दिखाने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर पहली बारिश ने ही सवालिया निशान लगा दिया है। हल्की बारिश के बाद ही सड़क के कई हिस्सों में कटाव और क्षति दिखाई देने लगी है, जिसके बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर चिंता जताई है।
दरभंगा के बहेड़ी प्रखंड क्षेत्र में निमैठी से बघबा तक करीब 12 किलोमीटर हिस्से में इस सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। बताया जा रहा है कि कई गांवों से होकर गुजरने वाली इस सड़क का पीसीसी ढलाई का काम पूरा हो चुका है, लेकिन बारिश के बाद सड़क के किनारे बने शोल्डर और आसपास की मिट्टी में कटाव देखने को मिला है। बघबा, चनहा, कुम्हराडीह, चकराईपुर, महेशपुर, जोरजा, निमैठी और दिलावरपुर सहित कई इलाकों में सड़क की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने सड़क निर्माण के दौरान जरूरी तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया। लोगों का कहना है कि फ्लैंक प्रोटेक्शन, अर्थ वर्क, ग्रेडिंग, कंपेक्शन और क्यूरिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही बरती गई। यही वजह है कि सामान्य बारिश में ही सड़क के किनारे की मिट्टी बहने लगी और कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं।
लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में भारी वाहनों के दबाव से सड़क के किनारों में दरारें पड़ सकती हैं। सड़क धंसने जैसी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी बड़ी सड़क परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन यहां शुरुआती दौर में ही खामियां सामने आने लगी हैं।
मामले को लेकर मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार चौधरी ने निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, अभियंताओं, प्रमंडल आयुक्त और जिलाधिकारी को ईमेल के माध्यम से जानकारी दी है।
प्रदीप कुमार चौधरी ने मांग की है कि निर्माण एजेंसी को तकनीकी मानकों के अनुसार काम करने के निर्देश दिए जाएं। उन्होंने फ्लैंक प्रोटेक्शन, साइड स्लोप स्टेबिलिटी, उचित कंपेक्शन, मिट्टी का स्थिरीकरण और साइड प्रोटेक्शन जैसे कार्यों को मजबूत तरीके से पूरा कराने की बात कही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में गुणवत्ताहीन बलुआही मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे सड़क की मजबूती और लंबी अवधि तक टिकाऊ रहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि अगर अभी से सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में सड़क की हालत खराब हो सकती है और सरकार के करोड़ों रुपये के निवेश पर भी सवाल उठ सकते हैं।
वहीं, इस मामले में एनएच-527ई के अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार वर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। अब लोगों की नजर विभाग की कार्रवाई पर है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि सड़क निर्माण की जांच कराई जाए और अगर कहीं भी लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी पर कार्रवाई की जाए।
एनएच-527ई ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना क्षेत्र के लोगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और विकास की उम्मीद लेकर आई थी। लेकिन निर्माण के शुरुआती चरण में ही सामने आई समस्याओं ने परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग इन शिकायतों पर कितनी जल्दी कदम उठाता है और सड़क को मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए क्या कार्रवाई करता है।





