बिहार

निजी अस्पताल ने मुफ्त में किया इलाज

Saba Naaz
30 Jun 2026 9:57 PM IST
निजी अस्पताल ने मुफ्त में किया इलाज
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दरभंगा: बिरौल इलाके में एक बेहद भावुक करने वाला मामला सामने आया है, जहां गंभीर हालत में जन्मे नवजात की जान एक निजी अस्पताल की संवेदनशील पहल से बच गई। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए यह घटना किसी बड़ी राहत से कम नहीं रही।

जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले बिरौल की एक बंजारन महिला ने सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के कुछ ही मिनट बाद नवजात की हालत गंभीर हो गई और उसे सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई। स्थिति को देखते हुए सरकारी डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) रेफर कर दिया। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वे बच्चे को दरभंगा ले जाने में असमर्थ थे। ऐसे में परिजन निराश होकर किसी मदद की तलाश में थे। इसी दौरान उन्हें सुपौल बाजार के शेखपुरा स्थित एक निजी बच्चा अस्पताल के बारे में जानकारी मिली।

परिजन नवजात को तुरंत उस अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां अस्पताल प्रबंधन ने बिना समय गंवाए बच्चे को भर्ती कर लिया। अस्पताल के प्रबंधक मो. तारिक अनवर उर्फ चांद और मो. तनवीर ने मानवता दिखाते हुए नवजात को एनआईसीयू में भर्ती कराया और इलाज शुरू किया। सबसे खास बात यह रही कि अस्पताल ने इस पूरे इलाज के लिए परिवार से कोई शुल्क नहीं लिया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सद्दाम हुसैन ने बताया कि नवजात को गंभीर सांस संबंधी समस्या और संक्रमण था। उसकी हालत बेहद नाजुक थी और तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। साथ ही जरूरी दवाइयां और लगातार निगरानी शुरू की गई। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने तीन दिनों तक लगातार देखभाल की, जिसके बाद बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा।

तीन दिनों की मेहनत के बाद नवजात पूरी तरह स्वस्थ हो गया और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्चे के स्वस्थ होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल लौट आया। बच्चे के पिता ने भावुक होकर कहा कि सरकारी अस्पताल से रेफर होने के बाद वे पूरी तरह टूट चुके थे, क्योंकि उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल उनके लिए भगवान की तरह साबित हुआ, जिसने बिना एक रुपया लिए उनके बच्चे की जान बचाई।

अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सेवा करना है और वे आगे भी जरूरतमंद बच्चों का मुफ्त इलाज जारी रखेंगे। प्रबंधन ने यह भी कहा कि पैसों की कमी के कारण किसी भी नवजात की जान नहीं जानी चाहिए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल की इस पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि इस तरह की मानवता की मिसाल समाज में उम्मीद जगाती है और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण बता रहे हैं।

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