बिहार

वोट चोरी के विवाद पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान

Ratna Netam
15 Oct 2026 8:37 PM IST
वोट चोरी के विवाद पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान
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सुपौल। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग कई मौकों पर सत्ताधारी दल की मदद करता हुआ दिखाई देता है। प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ठोस सुधार जरूरी हैं। जब तक ऐसे सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक चुनावी व्यवस्था को लेकर जनता में असंतोष बना रहेगा और विरोध प्रदर्शन जारी रह सकते हैं।प्रशांत किशोर ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बिहार के सुपौल में कोसी स्नातक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव प्रचार के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कहीं। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी।
चुनाव आयोग की कार्यशैली से जनता संतुष्ट नहीं'
प्रशांत किशोर ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं।उनके मुताबिक, यह असंतोष किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति तक सीमित नहीं है। पिछले आठ से दस वर्षों के दौरान मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और आदर्श आचार संहिता लागू करने के तरीकों को लेकर लोगों में सवाल पैदा हुए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यशैली कई बार सत्ताधारी दल के पक्ष में दिखाई देती है।हालांकि, ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं। केवल इन बयानों के आधार पर चुनाव आयोग की पक्षपातपूर्ण भूमिका सिद्ध नहीं होती।
'जब तक सुधार नहीं होंगे, प्रदर्शन जारी रहेंगे'
प्रशांत किशोर ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में विश्वसनीय सुधार किए जाने चाहिए।उनके अनुसार, यदि लोगों के मन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर संदेह बना रहेगा, तो विरोध प्रदर्शन भी जारी रह सकते हैं।प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक दलों के बीच विवाद मानने के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बताया।
कोसी स्नातक चुनाव को लेकर सरकार पर निशाना
सुपौल में चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार की कार्यप्रणाली की भी आलोचना की।उन्होंने कहा कि कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव किसी सरकार को बनाने या गिराने के लिए नहीं है, बल्कि मौजूदा सरकार से जवाबदेही मांगने का अवसर है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव जीतने के बाद शिक्षकों की मांगों को नजरअंदाज किया और बाढ़ प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।इसके अलावा उन्होंने राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
शिक्षकों और बेरोजगार युवाओं के मुद्दे उठाए
प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों और शिक्षित बेरोजगार युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।उन्होंने कहा कि शिक्षकों के वेतनमान और सेवा संबंधी मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।सुपौल में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. रजनीश रंजन के समर्थन में प्रचार किया।इस मौके पर उन्होंने 10 हजार शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने का वादा किया। साथ ही शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ देने की बात भी कही।
चुनावी पारदर्शिता पर जोर
प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था महत्वपूर्ण है। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने से लेकर चुनाव संचालन तक की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।भारत निर्वाचन आयोग देश में चुनावों के संचालन के लिए जिम्मेदार एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण और चुनावी नियमों का पालन सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारियों में शामिल है।हालांकि, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठाए गए आरोपों का निर्धारण प्रमाणों और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ही किया जा सकता है।
बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान जहां निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, वहीं राज्य सरकार की जवाबदेही, शिक्षकों की समस्याओं और बाढ़ पीड़ितों की स्थिति को भी प्रमुख मुद्दा बनाया।उनके बयान के बाद चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई है।
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