
Bihar:TMC कंट्रोवर्सी|20 सांसदों के विलय और सिंबल विवाद से गरमाई बंगाल की सियासत|पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। पार्टी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर एक अलग संगठन एनसीपीआई (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) में विलय की घोषणा की है। इसके बाद सियासी हलचल तेज हो गई है और पार्टी के सिंबल पर भी दावे की बात सामने आ रही है। बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है और वे इसे “सुधारने” की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे असली TMC हैं और चुनाव चिह्न पर दावा करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “एक नया खेल शुरू हो गया है, खेला होबे”, और दावा किया कि इससे बंगाल में विकास और रोजगार आएगा। साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह डरी हुई हैं और पार्टी बैठकों तक नहीं बुला पा रही हैं।
दूसरी ओर, टीएमसी ने इस पूरे कदम को दलबदल विरोधी कानून के तहत अवैध बताया है। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार केवल सांसदों का नहीं बल्कि पूरी राजनीतिक पार्टी का विलय जरूरी होता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया। वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने कहा कि असली टीएमसी वही है जिसकी अध्यक्ष ममता बनर्जी हैं और चुनाव चिह्न “दो फूल” पार्टी की पहचान है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी सांसदों का कदम मतदाताओं के साथ धोखा है। वहीं राजनीतिक खींचतान सिर्फ संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी असर दिख रहा है। हाल ही में पार्टी के कई विधायकों के अलग गुट बनने की खबरें सामने आई थीं। अब यह विवाद और गहराता नजर आ रहा है, जिससे बंगाल की राजनीति में बड़ा टकराव पैदा हो गया है।





