
दरभंगा: राष्ट्रीय कवि संगम की दरभंगा जिला इकाई के तत्वावधान में रविवार को एक भव्य प्रमंडल स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। सारा मोहनपुर स्थित राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांतीय महामंत्री डॉ. राज कुमार भारती के आवास परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में दरभंगा प्रमंडल के कई जाने-माने साहित्यकारों, कवियों और बुद्धिजीवियों का समागम हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित सभी रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में राष्ट्र जागरण और राष्ट्रीयता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का सामूहिक संकल्प लिया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ
कवि सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इस गरिमामयी कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. चन्द्र मोहन पोद्दार ने की। सम्मेलन में आए सभी अतिथि कवियों और श्रोताओं का स्वागत करते हुए प्रांतीय महामंत्री डॉ. राज कुमार भारती ने कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम की दरभंगा इकाई साहित्य के क्षेत्र में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। यहाँ के रचनाकार अपनी लेखनी के माध्यम से देश और समाज को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के कालजयी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का यह पवित्र अभियान भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगा।
कविता समाज में बदलाव का सशक्त माध्यम: अध्यक्ष
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. चन्द्र मोहन पोद्दार ने कविता की ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कविता केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक और क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इतिहास गवाह है कि जब-जब देश को दिशा की जरूरत पड़ी है, कवियों की वाणी ने राष्ट्र को जगाया है। राष्ट्रीय कवि संगम इसी राष्ट्र जागरण के महान उद्देश्य को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है और इस तरह के प्रमंडल स्तरीय आयोजन युवाओं में देशभक्ति की भावना को और गहरा करते हैं।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी से प्रेरणा लेने का आह्वान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और दरभंगा प्रमंडल प्रभारी सह प्रांतीय मंत्री सुधीर कुमार सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ महज एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक हर भारतीय के लिए ऊर्जा और प्रेरणा का महास्रोत है। उन्होंने उपस्थित सभी साहित्यकारों से आह्वान किया कि वे महान लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कालजयी लेखनी से प्रेरणा लें। आज के समय में भी लेखकों को अपनी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक चेतना के भाव को पूरी प्रखरता के साथ बनाए रखना चाहिए ताकि समाज में एकता बनी रहे।
देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों की कविताओं से बंधा समां
मशहूर कवि ऋषि रोही के कुशल और जीवंत मंच संचालन में कवि सम्मेलन देर शाम तक चलता रहा। सम्मेलन में प्रमंडल के कोने-कोने से आए रचनाकारों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य पाठ करने वालों में प्रमुख रूप से सुरेश वर्मा, उदय शंकर चौधरी ‘नादान’, रीतू प्रज्ञा, संगीता कुमारी, अपर्णा मिश्रा, डॉली कुमारी, वैद्यनाथ पोद्दार, अमरजीत कुमार ‘अमर’, मुकेश झा ‘सोनू’, अमिताभ कुमार सिन्हा, नंद किशोर साहु, कुमार शुभांश, किरण कुमारी, स्वर्णिम किरण और डॉ. प्रतिभा स्मृति शामिल थीं। इन कवियों ने वीर रस, राष्ट्रभक्ति और समसामयिक सामाजिक मुद्दों पर एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिस पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। कार्यक्रम के अंत में सुधीर कुमार सिंह ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया और सम्मेलन राष्ट्रीय एकता के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।





