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सस्ती दवाओं से बिहारवासियों को बड़ी राहत, हजारों करोड़ रुपये की हुई बचत
पटना : बिहार में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (PM Jan Aushadhi Kendra) लोगों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का बड़ा माध्यम बनकर उभरे हैं। इन केंद्रों से दवाएं खरीदकर बिहार के लोगों ने अब तक करीब 2000 करोड़ रुपये की बचत की है। यहां मिलने वाली जेनेरिक दवाएं कई बार ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि आम लोगों को महंगी दवाओं के बोझ से राहत मिले और हर व्यक्ति को कम कीमत पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो सकें।
कम कीमत में मिल रही गुणवत्तापूर्ण दवाएं
जन-औषधि केंद्रों पर उपलब्ध दवाएं गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के बाद ही बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं। इन केंद्रों पर सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर रोगों तक की कई जरूरी दवाएं कम कीमत में मिलती हैं।
इससे खासकर मध्यम वर्ग, गरीब परिवारों और लंबे समय तक दवा लेने वाले मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है।
ब्रांडेड दवाओं से काफी कम कीमत
ब्रांडेड दवाओं की तुलना में जेनेरिक दवाओं की कीमत काफी कम होती है। कई दवाएं 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत में उपलब्ध होने से मरीजों का मासिक खर्च घटा है।
उदाहरण के तौर पर, लंबे समय तक चलने वाली दवाओं में कीमत का अंतर मरीजों के लिए बड़ी बचत साबित हो रहा है।
बिहार में बढ़ा जन-औषधि केंद्रों का नेटवर्क
राज्य में जन-औषधि केंद्रों की संख्या बढ़ने से लोगों को अपने आसपास ही सस्ती दवाएं उपलब्ध हो रही हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन केंद्रों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
गरीब और जरूरतमंद मरीजों को फायदा
कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें लंबे समय तक दवाओं की जरूरत होती है। महंगी दवाओं के कारण इलाज का खर्च बढ़ जाता है। जन-औषधि केंद्रों ने ऐसे लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाने में मदद की है।
स्वास्थ्य खर्च कम करने की दिशा में कदम
स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाओं का खर्च एक बड़ी चुनौती रहा है। जन-औषधि योजना का उद्देश्य इसी खर्च को कम करना और लोगों को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ने से आने वाले समय में आम लोगों को और अधिक आर्थिक लाभ मिल सकता है।
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