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56% वाहनों का इंश्योरेंस नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चालान कार्रवाई के दिए निर्देश

nidhi
5 Aug 2026 8:39 AM IST
56% वाहनों का इंश्योरेंस नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चालान कार्रवाई के दिए निर्देश
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बिना इंश्योरेंस चल रही 56% गाड़ियों पर होगी कार्रवाई, काटे जाएंगे चालान

नई दिल्ली : देश में बिना बीमा चल रहे वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि जिन वाहनों का वैध इंश्योरेंस नहीं है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान काटे जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा मिलने में मुश्किल आती है।
56 फीसदी वाहनों का नहीं है बीमा
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह जानकारी रखी गई कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 56 प्रतिशत वाहन ऐसे हैं जिनका अनिवार्य मोटर इंश्योरेंस नहीं है।
अदालत ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए नियमों के प्रभावी पालन पर जोर दिया।
बिना बीमा वाहन चलाना है नियमों का उल्लंघन
मोटर वाहन कानून के तहत सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाने के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। बिना बीमा वाहन चलाने पर जुर्माने और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
राज्यों को सख्ती बरतने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके लिए परिवहन विभाग और पुलिस को प्रभावी निगरानी व्यवस्था अपनाने को कहा गया है।
दुर्घटना पीड़ितों की सुरक्षा पर जोर
अदालत ने कहा कि वाहन बीमा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने का माध्यम भी है।
यदि दुर्घटना में दोषी वाहन का बीमा नहीं होता है, तो मुआवजा मिलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वाहन मालिकों के लिए जरूरी सलाह
वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि—
अपने वाहन का इंश्योरेंस समय पर रिन्यू कराएं।
बीमा पॉलिसी की वैधता जांचते रहें।
बिना बीमा वाहन चलाने से बचें।
वाहन दस्तावेज हमेशा अपडेट रखें।
सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से सड़क सुरक्षा नियमों के पालन में सुधार आ सकता है। साथ ही, बीमा कवरेज बढ़ने से दुर्घटना पीड़ितों को आर्थिक सहायता मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।

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