बिहार
चैती दुर्गा मंदिर परिसर पिपरिया में आयोजित किया गया पौधारोपण
Gulabi Jagat
26 May 2025 10:54 PM IST

x
Lakhisarai, लखीसराय। वट सावित्री व्रत के अवसर पर पर्यावरण भारती द्वारा देव वृक्ष बरगद, फलदार वृक्ष कटहल, बेल, नींबू, कदम्ब के 5 पेड़ लगाये गए। पौधारोपण का नेतृत्व पर्यावरण प्रहरी प्रशांत कुमार यदुवंशी ने किया।
पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक तथा अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से धरती माता की सुरक्षा हेतु वृक्षारोपण अभियान संसार के प्रत्येक मानव को चलाना होगा। इससे ही पर्यावरण संतुलन संभव है।
भारत की महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमति द्रौपदी मुर्मू जी ने अपने बचपन के प्रसंग सुनाये। वे उड़ीसा राज्य के गाँव के निवासी हैं। उनके पूज्य पिताजी जब जलावन के लिए सूखे वृक्ष काट रहे थे, तब उन्होंने सूखे पेड़ से भी क्षमा माँगे। उन्होंने कहा कि वे जब हरे वृक्ष थे, तब मानव को फल,फूल, छाया, प्राकृतिक ऑक्सीजन प्रदान किये। अतः सूखने के बाद भी पूज्य हैं। परन्तु जलावन हेतु सूखी लकड़ी आवश्यक है। इसलिए क्षमा माँगे। परन्तु आधुनिक चकाचौंध में मनुष्य हरे- भरे वृक्ष को काट डालते हैं। परिणामस्वरूप क्लाइमेट चेन्ज स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
शाण्डिल्य ने बताया कि भारत में प्राचीन काल से ही ज्येष्ठ मास की अमावश्या को वट सावित्री व्रत पूजन होता है। भारत की सुहागिन महिलायें इस व्रत को विधि विधान से करतीं हैं। उन्हें अखंड सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त होता है। सुहागिन महिलायें व्रत रखकर वट-वृक्ष की पूजा करती हैं। भारत में सबसे पहले वट सावित्री व्रत राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने अपने पति सत्यवान के लिए किया था। यह व्रत महिलायें अपने पति के मंगल कामना हेतु रखती हैं। प्रत्येक सुहागिन महिलाओं को यह व्रत करना आवश्यक है। पुरोहित द्वारा सत्यवान- सावित्री की कथा भी सुनाई जाती है। सावित्री ने वट सावित्री व्रत के कारण ही अपने पति सत्यवान के प्राण को यमराज से वापस प्राप्त किये। वट सावित्री व्रत सुख- समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। इस व्रत में बरगद पेड़ का विधिवत पूजन के बाद कच्चे धागे लपेटकर परिक्रमा किया जाता है। इसके बाद भगवान शिवजी से पति के दीर्घायु होने के लिए प्रार्थना किया जाता है। इस व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं में काफी उत्साह होता है और वे एकत्रित होकर विधि विधान से पूजन करतीं हैं।
वट सावित्री व्रत के पूजन हेतु बरगद का वृक्ष आवश्यक है। अतः देव वृक्ष बरगद का पौधारोपण सार्वजनिक स्थान पर करें और वट सावित्री व्रत पूजन किया जाये। यह पुनीत कार्य है।
पर्यावरण भारती के पौधारोपण अभियान में वार्ड सदस्या ऊषा देवी, रिंकू देवी, पूजा देवी, सुलेना देवी, राम बिलास शाण्डिल्य, प्रशांत कुमार यदुवंशी, ललन कुमार, राहुल कुमार, गोकर्ण कुमार, राजीव रंजन कुमार, रौशन कुमार, कैलाश यादव इत्यादि ने भाग लिए।
Tagsजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचारचैती दुर्गा मंदिर परिसर पिपरियाआयोजितपौधारोपण
Next Story





