बिहार

21 दिन बाद थमा PhD स्कॉलर्स का आंदोलन, राज्यपाल से वार्ता के बाद बनी सहमति

Kavita2
25 Aug 2026 10:32 AM IST
21 दिन बाद थमा PhD स्कॉलर्स का आंदोलन, राज्यपाल से वार्ता के बाद बनी सहमति
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पटना। बिहार में PhD स्कॉलर्स और गेस्ट फैकल्टी सदस्यों की विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 21 दिनों से चल रहा विरोध प्रदर्शन अब खत्म होने की राह पर है। सोमवार को राज्यपाल सैयद अता हसनैन के साथ हुई बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई। लोक भवन में राज्यपाल के साथ करीब दो घंटे तक चली बैठक में ‘ऑल PhD होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन’ के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगें विस्तार से रखीं।

राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों ने भरोसा दिलाया कि वे अपनी भूख हड़ताल भी समाप्त कर देंगे। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि उनकी मांगों पर संबंधित स्तर पर विचार किया जा रहा है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त करने की दिशा में सहमति व्यक्त की।

4 अगस्त से चल रहा था प्रदर्शन

PhD होल्डर्स और गेस्ट फैकल्टी सदस्य 4 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कुमुद पटेल नाम के एक व्यक्ति ने लगातार भूख हड़ताल भी की। लंबे समय से चल रहे आंदोलन के कारण शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दे राज्य में चर्चा का विषय बने हुए थे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिहार के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े लोगों के सामने रोजगार और नियुक्ति से संबंधित कई समस्याएं हैं। उनका आरोप था कि योग्य PhD धारकों और गेस्ट फैकल्टी सदस्यों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप अवसर नहीं मिल रहे हैं। इसी को लेकर वे सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से नीतिगत बदलाव की मांग कर रहे थे।

UGC नियम 2018 लागू करने की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में UGC रेगुलेशन 2018 के टेबल 3A को लागू करना शामिल है। उनका कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में UGC के निर्धारित मानकों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को उनके शोध और शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर उचित अवसर मिल सके।

PhD स्कॉलर्स और शोधार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित नियमों को लागू करना जरूरी है।

अधिकतम उम्र सीमा 55 साल करने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद के आवेदकों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करने की मांग भी उठाई। उनका तर्क है कि शोध और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने वाले योग्य उम्मीदवारों को उम्र के आधार पर अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि कई शोधार्थी PhD पूरी करने, पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च या अकादमिक अनुभव हासिल करने में काफी समय लगाते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा को लेकर अधिक लचीला रुख अपनाया जाना चाहिए।

विश्वविद्यालयों में नियमित नियुक्ति की मांग

प्रदर्शनकारियों की एक अन्य प्रमुख मांग बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियों को नियमित करने से जुड़ी है। गेस्ट फैकल्टी के तौर पर काम करने वाले शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा व्यवस्था में स्थायित्व का अभाव है।

उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने के साथ-साथ लंबे समय से सेवा दे रहे योग्य शिक्षकों के भविष्य को भी सुरक्षित किया जाना चाहिए। नियमित नियुक्तियों से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को स्थिरता मिलने की उम्मीद जताई गई है।

डोमिसाइल पॉलिसी की भी मांग

प्रदर्शनकारियों ने बिहार के विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों के लिए डोमिसाइल पॉलिसी लागू करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षण और शोध के अवसरों में स्थानीय अभ्यर्थियों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

डोमिसाइल नीति को लेकर बिहार में पहले भी विभिन्न वर्गों की ओर से मांग उठती रही है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों में बिहार के योग्य उम्मीदवारों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

राज्यपाल से दो घंटे चली बातचीत

सोमवार को प्रदर्शनकारियों के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने लोक भवन में राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात की। बैठक करीब दो घंटे तक चली। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सभी प्रमुख मांगें राज्यपाल के सामने रखीं।

बैठक के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नियुक्ति प्रक्रिया, उम्र सीमा, गेस्ट फैकल्टी की स्थिति और डोमिसाइल नीति सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, इन मांगों पर विचार किए जाने का भरोसा दिया गया।

बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई। साथ ही भूख हड़ताल खत्म करने का भी भरोसा दिया गया। इससे 21 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के समाप्त होने का रास्ता साफ हो गया है।

आगे सरकार के फैसले पर नजर

राज्यपाल से बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जरूर बन गई है, लेकिन अब प्रदर्शनकारियों की नजर सरकार और संबंधित विश्वविद्यालयों की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदमों पर होगी। प्रदर्शनकारियों की कई मांगें नीतिगत बदलाव से जुड़ी हैं, इसलिए उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों और विश्वविद्यालयों की ओर से आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

PhD स्कॉलर्स और गेस्ट फैकल्टी सदस्यों के आंदोलन ने बिहार में उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांगों में नियुक्ति नियमों को UGC मानकों के अनुरूप बनाने से लेकर आयु सीमा बढ़ाने और नियमित नियुक्तियों तक कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

फिलहाल राज्यपाल के साथ हुई बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त होने की स्थिति बनी है। 4 अगस्त से जारी प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद सोमवार की बैठक को दोनों पक्षों के बीच संवाद की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन किस तरह आगे बढ़ते हैं और उन्हें लागू करने के लिए क्या ठोस निर्णय लिए जाते हैं।

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