
पटना। बिहार में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी बनाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि राज्य में फिल्म सिटी का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने भोजपुरी फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों और फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों से मिलकर उपयुक्त स्थान चिह्नित करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के युवाओं और बच्चों में अभिनय से लेकर निर्देशन, लेखन, संगीत और फिल्म निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रतिभा और क्षमता मौजूद है। सरकार इस प्रतिभा को बेहतर मंच और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार लंबे समय से कला, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा वाला प्रदेश रहा है। यहां की लोक कला, संगीत, रंगमंच और साहित्य ने देश को कई प्रतिभाएं दी हैं। फिल्म जगत में भी बिहार से जुड़े कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में राज्य में फिल्म सिटी के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही प्रदेश में फिल्म निर्माण से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
उन्होंने भोजपुरी फिल्म उद्योग के कलाकारों से आग्रह किया कि फिल्म सिटी के लिए ऐसा स्थान चुना जाए, जो प्राकृतिक और भौगोलिक दृष्टि से फिल्म निर्माण के लिए उपयुक्त हो। मुख्यमंत्री के मुताबिक, स्थान चयन में फिल्म जगत से जुड़े लोगों का अनुभव महत्वपूर्ण होगा। कलाकार और फिल्म निर्माता यह बेहतर तरीके से बता सकते हैं कि शूटिंग, स्टूडियो, तकनीकी सुविधाओं और अन्य आवश्यक ढांचे के लिए किस तरह का स्थान सबसे उपयोगी रहेगा।
फिल्म सिटी के निर्माण की योजना को बिहार के मनोरंजन और रचनात्मक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि राज्य में आधुनिक सुविधाओं से लैस फिल्म सिटी विकसित होती है तो फिल्म निर्माताओं को शूटिंग के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण से जुड़े रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के लिए उचित अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। अभिनय के साथ-साथ निर्देशन, पटकथा लेखन, गीत-संगीत, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, साउंड और प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में भी बिहार के युवा आगे बढ़ सकते हैं। सरकार इन क्षेत्रों में बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
फिल्म सिटी बनने से केवल कलाकारों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे फिल्म निर्माण से जुड़े तकनीकी और गैर-तकनीकी क्षेत्रों में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। कैमरा, लाइट, मेकअप, कॉस्ट्यूम, सेट डिजाइन, एडिटिंग, साउंड रिकॉर्डिंग और प्रोडक्शन मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों की आवश्यकता होती है। स्थानीय युवाओं को इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण और काम के अवसर मिलने से राज्य में एक नया रचनात्मक रोजगार क्षेत्र विकसित हो सकता है।
बिहार की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान भी फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है। राज्य में ऐतिहासिक स्थलों, ग्रामीण परिवेश, नदियों, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के साथ अलग-अलग तरह के प्राकृतिक दृश्य मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए किया जा सकता है। फिल्म सिटी के साथ शूटिंग की अनुमति और स्थानीय सुविधाओं को व्यवस्थित करने की नीति भी विकसित की जाए तो राज्य फिल्म निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
भोजपुरी सिनेमा के लिए तो बिहार का महत्व पहले से ही काफी अधिक है। भोजपुरी फिल्मों का बड़ा दर्शक वर्ग बिहार और आसपास के राज्यों के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी मौजूद है। फिल्म सिटी बनने से भोजपुरी फिल्मों को स्थानीय स्तर पर बेहतर तकनीकी सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे फिल्म निर्माण की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ उद्योग को व्यवस्थित और आधुनिक बनाने में मदद मिल सकती है।
फिल्म सिटी के निर्माण से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। फिल्म निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, खान-पान, कलाकारों और तकनीकी कर्मचारियों की सेवाओं के साथ अन्य कई व्यवसायों को काम मिलता है। बड़े स्तर पर शूटिंग होने पर स्थानीय बाजार में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसके अलावा राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने में भी फिल्मों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, फिल्म सिटी को सफल बनाने के लिए केवल स्टूडियो और शूटिंग स्थल विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा। आधुनिक तकनीकी सुविधाएं, पोस्ट प्रोडक्शन की व्यवस्था, प्रशिक्षण केंद्र, कलाकारों के लिए सुविधाएं और फिल्म निर्माताओं के लिए आसान प्रक्रियाएं भी विकसित करनी होंगी। सरकार को फिल्म निर्माण से जुड़ी अनुमतियों और अन्य औपचारिकताओं को सरल बनाने पर भी ध्यान देना होगा।
मुख्यमंत्री की ओर से कलाकारों से स्थान चिह्नित करने का आग्रह इस दिशा में सहभागिता आधारित योजना की ओर संकेत करता है। इससे फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को योजना के शुरुआती चरण में ही शामिल किया जा सकेगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि फिल्म सिटी का ढांचा वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित हो।
बिहार में फिल्म सिटी की घोषणा के साथ राज्य के फिल्म जगत से जुड़े लोगों में भी उम्मीदें बढ़ी हैं। यदि योजना समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है और आधुनिक सुविधाओं के साथ फिल्म सिटी विकसित होती है तो बिहार में फिल्म निर्माण के लिए नया माहौल तैयार हो सकता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि सरकार राज्य की प्रतिभाओं को बेहतर अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। अब फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों और विशेषज्ञों की भूमिका यह तय करने में अहम होगी कि फिल्म सिटी के लिए कौन सा स्थान सबसे उपयुक्त है और वहां किन सुविधाओं की जरूरत होगी। फिल्म सिटी की यह पहल बिहार की प्रतिभाओं को स्थानीय स्तर पर मंच देने के साथ राज्य को फिल्म निर्माण के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।





