बिहार

Munger में पुराने भूमि रिकॉर्ड डिजिटल, लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

Kavita2
15 July 2026 2:06 PM IST
Munger में पुराने भूमि रिकॉर्ड डिजिटल, लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
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मुंगेर : बिहार के मुंगेर जिले में भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की महत्वाकांक्षी परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। जिला निबंधन कार्यालय में वर्ष 1908 से 1995 तक के रजिस्टरों और भूमि संबंधी दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद लोगों को दशकों पुराने रजिस्ट्री दस्तावेजों की तलाश में सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भूमि रिकॉर्ड तक पहुंच आसान होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों के निपटारे में भी सुविधा मिलेगी।

जिला अवर निबंधन पदाधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि लगभग एक वर्ष पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत पुराने रजिस्टरों, दस्तावेजों और अभिलेखों की सावधानीपूर्वक स्कैनिंग कर उन्हें डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित किया जा रहा है। स्कैन किए गए रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है, ताकि भविष्य में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित रहे और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1908 से लेकर 1995 तक के भूमि अभिलेखों का डिजिटाइजेशन लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह कार्य पूरा होने के बाद नागरिकों को वर्षों पुराने रजिस्ट्री दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से दस्तावेजों की खोज कुछ ही समय में संभव हो सकेगी।

परियोजना के तहत दस्तावेजों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जा रहा है कि उन्हें विभिन्न आधारों पर आसानी से खोजा जा सके। नागरिक मौजा, खाता-खेसरा संख्या, रजिस्ट्री की तिथि, क्रेता और विक्रेता के नाम या पूर्वजों के नाम के आधार पर भी पुराने दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे विशेष रूप से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पैतृक संपत्ति या पुराने भूमि विवादों से जुड़े रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है।

अब तक पुराने अभिलेखों की तलाश एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होती थी। कई बार वर्षों पुराने रजिस्टरों में दस्तावेज ढूंढने में घंटों या कई दिनों का समय लग जाता था। इसके अलावा पुराने कागजी रिकॉर्ड समय के साथ खराब होने, फटने या नष्ट होने का भी खतरा बना रहता था। डिजिटाइजेशन के बाद इन समस्याओं से काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से सरकारी कार्यों में भी तेजी आएगी। भूमि खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार, बैंक ऋण, न्यायालयी मामलों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आवश्यक दस्तावेज कम समय में उपलब्ध हो सकेंगे। इससे सरकारी कार्यालयों में कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अभिलेखों का डिजिटाइजेशन ई-गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे, बल्कि भूमि संबंधी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े पर भी काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से किसी भी दस्तावेज की सत्यता की जांच करना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा।

जिला प्रशासन का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद आम नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी जानकारी के लिए कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा धन दोनों की बचत होगी।

भूमि विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में, जहां बड़ी संख्या में पुराने भूमि रिकॉर्ड अब भी कागजी स्वरूप में सुरक्षित हैं, वहां इस तरह की परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पुराने दस्तावेजों का डिजिटल संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी साबित होगा और ऐतिहासिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे।

मुंगेर जिला निबंधन कार्यालय की यह पहल राज्य में भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद न केवल नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि शेष कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद वर्ष 1908 से 1995 तक के सभी भूमि अभिलेख पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध होंगे, जिससे नागरिकों को वर्षों पुराने दस्तावेजों की खोज के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और भूमि संबंधी सेवाएं पहले से कहीं अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएंगी।

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