
पटना: लोकनायक जयप्रकाश नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (LNJP), राजवंशीनगर में स्वास्थ्य मंत्री निशांत के औचक निरीक्षण के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान मरीजों को निजी क्लीनिक भेजने, ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और मरीजों की देखभाल में लापरवाही के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने तीन डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा है और तय समय सीमा के अंदर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
बिहार सरकार सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। इसी अभियान के तहत स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने 7 जुलाई 2026 को पटना स्थित LNJP अस्पताल का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं, डॉक्टरों की उपस्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और चिकित्सा सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्याम किशोर से जुड़ा सामने आया। शिकायत मिली थी कि वह सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अपने निजी क्लीनिक जाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। जांच के दौरान इस संबंध में कुछ साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पताल के मरीजों को निजी क्लीनिक भेजने को सेवा नियमों और चिकित्सकीय नैतिकता का उल्लंघन माना है। विभाग की ओर से संबंधित डॉक्टर से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
वहीं, सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. राजकिशोर रौशन भी निरीक्षण के दौरान निर्धारित रोस्टर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। विभाग के अनुसार, वह बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के कार्यस्थल से अनुपस्थित थे। इसके अलावा उनके निजी क्लीनिक में काम करने की सूचना भी सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को भी गंभीरता से लेते हुए डॉक्टर से जवाब मांगा है। उनसे अपनी अनुपस्थिति और निजी क्लीनिक में कार्य करने से संबंधित स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा उप निदेशक (चिकित्सा) डॉ. अमरनाथ प्रसाद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। निरीक्षण में पाया गया कि उन्होंने अपने अधीन भर्ती मरीजों का नियमित वार्ड राउंड नहीं किया था। मरीजों की केस शीट में भी जरूरी चिकित्सकीय जानकारी दर्ज नहीं होने की बात सामने आई।
विभाग ने इसे मरीजों की देखभाल में लापरवाही और सेवा दायित्वों की अनदेखी माना है। इस मामले में डॉ. अमरनाथ प्रसाद को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अनुशासन और जवाबदेही बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को निजी क्लीनिक भेजना, बिना अनुमति ड्यूटी से गायब रहना या इलाज में लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों और चिकित्सकों को निर्देश दिया कि वे अपने कर्तव्यों का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन करें। सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि अस्पतालों में निगरानी अभियान आगे भी जारी रहेगा। डॉक्टरों की उपस्थिति, मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की नियमित समीक्षा की जाएगी। विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।





