बिहार

NEET महाफर्जीवाड़ा: जांच के लिए बनी SIT, 8 राज्यों में फैला नेटवर्क

Saba Naaz
26 Jun 2026 3:06 PM IST
NEET महाफर्जीवाड़ा: जांच के लिए बनी SIT, 8 राज्यों में फैला नेटवर्क
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पटना: नीट यूजी (NEET UG) री-एग्जाम में सामने आए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और धांधली की जांच को लेकर एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया गया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पूरे मामले की तह तक जाने और इस रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस हाई-प्रोफाइल टीम की कमान आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी (DIG) मानवजीत सिंह ढिल्लों को सौंपी गई है। इस टीम में उनके साथ एक एसपी (SP), पांच डीएसपी (DSP) और पांच इंस्पेक्टर रैंक के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो इस पूरे नेटवर्क को खंगालेंगे।

SIT ने संभाली कमान, NTA से मांगा अभ्यर्थियों का पूरा ब्योरा

गठन के साथ ही एसआईटी की टीम पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। जांच की शुरुआत करते हुए टीम ने परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से संपर्क साधा है। SIT ने एनटीए से संदिग्ध अभ्यर्थियों के रोल नंबर के आधार पर उनके पते, फोन नंबर और अन्य जरूरी जानकारियां मांगी हैं। इसके बाद उन उम्मीदवारों को पूछताछ के लिए कड़ा नोटिस भेजा जाएगा, जिनकी जगह दूसरे 'स्कॉलर' या फर्जी लोगों के परीक्षा में बैठने का आरोप है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने साफ किया है कि पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जाने के बाद भी अगर कोई अभ्यर्थी या संदिग्ध सामने नहीं आता है, तो एसआईटी की टीम सीधे उसके घर पर दबिश देगी और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि इस आक्रामक कार्रवाई से इस बड़े नेटवर्क में शामिल चेहरों को बेनकाब करने में मदद मिलेगी।

सॉल्वर गैंग की बड़ी साजिश: बिहार बुलाए गए थे 200 फर्जी अभ्यर्थी

जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, उसके अनुसार सॉल्वर गैंग ने बिहार में परीक्षा के दौरान करीब 200 फर्जी परीक्षार्थियों (सॉल्वर) को बिठाने की योजना बनाई थी। इस सिलसिले में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 21 जून को लखीसराय के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से 9 सॉल्वर और एक मूल अभ्यर्थी को रंगे हाथ पकड़ा गया था। इसके अलावा हाजीपुर से एक और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे 12 मुन्नाभाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इस महाफर्जीवाड़े में अब तक कुल 30 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। आर्थिक अपराध इकाई और स्थानीय पुलिस अब मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बुलाए गए 200 सॉल्वरों में से बाकी के बचे फर्जी लोगों ने किन-किन असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दी और वे कहां छुपे हुए हैं।

35 शहरों के केंद्रों की CCTV फुटेज और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की जांच शुरू

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां अब डिजिटल सबूतों को जुटाने में लग गई हैं। इसके तहत देश के 35 शहरों में बने 331 परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की गहनता से जांच की जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा के आयोजन से जुड़ी ठेका कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी कड़ी पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का यह भी दावा है कि 3 मई को आयोजित हुई मूल नीट यूजी परीक्षा में भी बिल्कुल इसी तरह का फर्जीवाड़ा किया गया था, जिसकी कड़ियों को अब री-एग्जाम के इस मामले से जोड़कर जांच को और तेज कर दिया गया है।

दिल्ली-यूपी समेत 8 राज्यों तक फैला है माफियाओं का नेटवर्क

एसआईटी की शुरुआती जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं है, बल्कि देशव्यापी नेटवर्क है। इस सॉल्वर गैंग का जाल बिहार के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कुल 8 राज्यों में फैला हुआ है। पुलिस को पुख्ता आशंका है कि यह गिरोह पिछले तीन वर्षों से लगातार देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाकर करोड़ों रुपये की धांधली को अंजाम दे रहा था। अब अलग-अलग राज्यों की पुलिस से समन्वय बिठाकर इस नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी है।

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