
Bihar: पटना संग्रहालय में शुक्रवार को जापान के प्रसिद्ध कला संरक्षक टोकियो हासेगावा को विशेष समारोह में सम्मानित किया गया। उन्हें मिथिला चित्रकला (मधुबनी पेंटिंग) को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और जापान में मिथिला म्यूजियम स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने किया।
मिथिला कला को दुनिया तक पहुंचाया
मंत्री ने कहा कि 1934 के भूकंप और 1964-65 के अकाल के बाद जब मिथिला पेंटिंग दुनिया के सामने आई, तब टोकियो हासेगावा ने इसकी महत्ता को समझा और इसे वैश्विक मंच दिया। वे वर्ष 1980 में मधुबनी पहुंचे और यहां के कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
जापान में स्थापित किया मिथिला म्यूजियम
हासेगावा ने पद्मश्री गंगा देवी, महासुंदरी देवी, बौआ देवी, कर्पूरी देवी सहित कई प्रसिद्ध कलाकारों को जापान आमंत्रित किया। उन्होंने इन कलाकारों के रहने और चित्र निर्माण का पूरा खर्च स्वयं उठाया। वर्ष 1982 में उन्होंने जापान के निगाता प्रांत के तोकामाची में ‘मिथिला म्यूजियम’ की स्थापना की, जिसमें आज 4000 से अधिक मिथिला चित्र सुरक्षित हैं।
भारत-जापान सांस्कृतिक रिश्तों पर जोर
सम्मान से अभिभूत हासेगावा ने कहा कि मिथिला चित्रकला केवल कला नहीं बल्कि संस्कृति और जीवन का प्रतिबिंब है। उन्होंने भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की बात कही।
कार्यक्रम में विशेष प्रस्तुति
समारोह के अंत में हासेगावा और उनकी टीम ने ‘स्टोन म्यूजिक’ की अनूठी प्रस्तुति दी, जिसमें पत्थरों से उत्पन्न ध्वनियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।





