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1 अक्टूबर से स्कूलों में नहीं पक रहा खाना
किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन पर आर्थिक संकट गहरा गया है। बहादुरगंज प्रखंड के अधिकांश सरकारी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों तथा पंजीकृत मदरसों में 1 अक्टूबर 2026 से बच्चों के लिए दोपहर का भोजन नहीं बन रहा है। पिछले चार-पांच महीनों से मध्याह्न भोजन योजना की राशि का आवंटन नहीं होने के कारण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने वाले वेंडरों का भुगतान अटक गया है। बकाया राशि नहीं मिलने से वेंडरों ने राशन और अन्य जरूरी सामग्री की आपूर्ति रोक दी है। इसका सीधा असर हजारों स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।
बहादुरगंज प्रखंड के कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता था। लेकिन विभागीय राशि समय पर नहीं मिलने के कारण विद्यालय प्रबंधन के सामने भोजन तैयार कराने की समस्या खड़ी हो गई है। विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और मदरसों के प्रधान मौलवियों का कहना है कि चार-पांच महीने से योजना की राशि नहीं मिली है। इसके कारण खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने वाले विक्रेताओं का भुगतान नहीं किया जा सका है। लंबे समय तक बकाया रहने के बाद वेंडरों ने सामग्री की आपूर्ति बंद कर दी।
इस बीच 5 अक्टूबर को वर्चुअल माध्यम से राशि आवंटित करने की घोषणा की गई थी। हालांकि, 8 अक्टूबर तक कई विद्यालयों और मदरसों के बैंक खातों में संबंधित राशि नहीं पहुंची थी। ऐसे में भोजन व्यवस्था दोबारा शुरू नहीं हो सकी है।
घर से टिफिन लेकर पहुंच रहे बच्चे
मध्याह्न भोजन बंद होने के बावजूद विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति जारी है। अभिभावक अपने बच्चों को दोपहर में भूखा नहीं रहने देने के लिए घर से टिफिन देकर स्कूल भेज रहे हैं। बहादुरगंज के मध्य विद्यालय नटुआपाड़ा में बुधवार को ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यहां दर्जनों बच्चे अपने घरों से टिफिन लेकर विद्यालय पहुंचे। दोपहर के भोजन के समय बच्चों ने अपने सहपाठियों के साथ खाना साझा किया। विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बंद होने से अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। पहले बच्चों को विद्यालय में भोजन मिलता था, लेकिन अब परिवारों को घर से भोजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
शिक्षकों ने पहले ही जताई थी चिंता
मध्याह्न भोजन योजना के भुगतान में देरी का मामला पहले भी सामने आ चुका है। सितंबर में बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर राशि जारी करने की मांग की थी। शिक्षक संघ ने बताया था कि वेंडरों से उधार में राशन और गैस सिलेंडर प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है। कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अपने पैसे से भोजन व्यवस्था चलानी पड़ रही थी। संघ ने चेतावनी दी थी कि जल्द राशि जारी नहीं होने पर 1 अक्टूबर से मध्याह्न भोजन योजना का संचालन बंद करना पड़ सकता है।
भुगतान के बाद शुरू होगी भोजन व्यवस्था
विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और मदरसों के प्रधान मौलवियों के अनुसार, विभाग से राशि मिलने के बाद वेंडरों का बकाया भुगतान किया जाएगा। इसके बाद खाद्य सामग्री की आपूर्ति सामान्य होने पर मध्याह्न भोजन योजना दोबारा शुरू की जा सकेगी। फिलहाल भुगतान में देरी से स्कूलों में भोजन तैयार नहीं हो पा रहा है। बच्चों के लिए शुरू की गई इस महत्वपूर्ण योजना के प्रभावित होने से विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
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