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किशनगंज में आशा कार्यकर्ता बनी मददगार
किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले से नवजात शिशु की देखभाल और आशा कार्यकर्ता की सतर्कता का एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। यहां बेलवा बस्ती में एक नवजात बच्चे को मां का दूध पीने में परेशानी हो रही थी। बच्चा सामान्य से अधिक समय तक सो रहा था और सुस्त दिखाई देने लगा था। परिवार ने शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी समझकर गंभीरता से नहीं लिया। इसी दौरान नियमित गृह भ्रमण पर पहुंची आशा कार्यकर्ता जोहरा खातून ने बच्चे की स्थिति को देखा और परिवार को तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया। समय पर उपचार मिलने से बच्चे की हालत में सुधार हुआ।
जानकारी के अनुसार, बेलवा बस्ती निवासी राजेश के परिवार में बच्चे के जन्म के बाद खुशी का माहौल था। प्रसव के बाद मां धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही थी और परिवार के सदस्य नवजात की देखभाल में जुटे हुए थे। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन कुछ दिन बाद बच्चे के व्यवहार में बदलाव आने लगा। नवजात पहले की तुलना में कम दूध पीने लगा और अधिक समय तक सोता रहता था। परिवार के लोगों ने इसे छोटे बच्चे की सामान्य कमजोरी मान लिया। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि दूध पीने में परेशानी और असामान्य सुस्ती किसी स्वास्थ्य समस्या के संकेत हो सकते हैं।
इसी बीच आशा कार्यकर्ता जोहरा खातून नियमित गृह भ्रमण के दौरान राजेश के घर पहुंचीं। उन्होंने बच्चे की स्थिति का निरीक्षण किया और उसकी मां से स्तनपान के बारे में जानकारी ली। बातचीत में पता चला कि नवजात पहले की तरह दूध नहीं पी रहा है।
आशा कार्यकर्ता ने इस बदलाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने परिवार को समझाया कि जन्म के बाद शुरुआती दिनों में बच्चे का दूध कम पीना और अत्यधिक सुस्त रहना गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए बच्चे की चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
परिवार ने आशा कार्यकर्ता की सलाह मानकर बच्चे को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने नवजात की आवश्यक जांच की और उपचार शुरू किया। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ और वह स्वस्थ होकर घर लौट आया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद शुरुआती 28 दिन नवजात के लिए बेहद संवेदनशील होते हैं। इस दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही होती है। ऐसे में स्तनपान में परेशानी, तेज सांस चलना, शरीर का अत्यधिक ठंडा या गर्म होना, सुस्ती और दौरे जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
किशनगंज में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही हैं। जन्म के बाद 42 दिनों तक की देखभाल में स्तनपान, स्वच्छता, टीकाकरण और संक्रमण के संभावित संकेतों के बारे में परिवारों को जानकारी दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से माताओं को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराने और शुरुआती छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में बच्चे को बिना चिकित्सकीय सलाह के शहद, घुट्टी या अन्य पदार्थ नहीं देने चाहिए।
बेलवा बस्ती की यह घटना बताती है कि नवजात की देखभाल में परिवार की जागरूकता और आशा कार्यकर्ताओं की नियमित निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। बच्चे के स्वास्थ्य में आने वाले छोटे बदलावों को भी नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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