
Bihar बिहार: जिले के कृषि विभाग में कार्यरत किसान सलाहकारों और अन्य कर्मियों के भविष्य निधि अंशदान में कथित गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। ताजा जांच में यह बात सामने आई है कि कर्मचारियों के ईपीएफ मद में काटी गई राशि को जमा कराने के लिए जो चालान विभाग को प्रस्तुत किए जाते थे, वे फर्जी पाए गए हैं।
ईपीएफ कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जमा राशि से संबंधित सभी चालान संदिग्ध और फर्जी हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
जानकारी के अनुसार, आत्मा (ATMA) में कार्यरत लेखापाल हर्ष रंजन पर किसान सलाहकारों और अन्य कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान की राशि के गबन का आरोप है। आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह काटी जाने वाली ईपीएफ राशि को नियमानुसार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में जमा करने के बजाय निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि ईपीएफ कार्यालय में राशि जमा दिखाने के लिए फर्जी चालान तैयार किए गए और उन्हें विभागीय अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर भ्रमित किया जाता रहा। इस तरीके से लंबे समय तक यह वित्तीय अनियमितता चलती रही, जिसकी जानकारी हालिया जांच में सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभागीय प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कर्मचारियों के भविष्य निधि जैसी संवेदनशील राशि में हुई इस अनियमितता ने प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा किया है।
ईपीएफ कार्यालय की रिपोर्ट के बाद अब विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। संबंधित दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कुल कितनी राशि का गबन हुआ है और इसमें किन-किन स्तरों पर लापरवाही हुई है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी चालान तैयार करने में किन बाहरी व्यक्तियों या संस्थानों की भूमिका रही है।
कर्मचारियों में इस खुलासे के बाद गहरा असंतोष और चिंता का माहौल है। कई कर्मचारियों ने मांग की है कि उनकी जमा राशि की पूरी पारदर्शी जांच हो और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
फिलहाल जांच जारी है और विभाग ने सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित कर लिए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





