बिहार

पटना विश्वविद्यालय में बड़ा विवाद जांच समिति बनी सियासी अखाड़ा

Ratna Netam
12 Sept 2026 7:51 PM IST
पटना विश्वविद्यालय में बड़ा विवाद जांच समिति बनी सियासी अखाड़ा
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पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित **आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU)** में जांच समिति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव (Registrar) ने शिक्षा विभाग के एक विशेष सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कुलसचिव का आरोप है कि विशेष सचिव ने उन्हें धमकी दी और कथित तौर पर “हाथ तुड़वा देने” जैसी बात कही। इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विरोध शुरू हो गया है और निलंबन की मांग को लेकर धरना दिया जा रहा है।
विवाद सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षा विभाग और कर्मचारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है। मामला अब केवल जांच समिति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अधिकारियों के बीच टकराव का रूप ले चुका है।
जांच समिति को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, AKU में एक मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। इसी जांच प्रक्रिया और समिति की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद पैदा हुआ।
कुलसचिव की ओर से आरोप लगाया गया कि जांच से जुड़े मामले में दबाव बनाया गया और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
इसके बाद कुलसचिव ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
हालांकि मामले में दूसरे पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी गई है, यह जांच का विषय है।
कुलसचिव ने लगाया गंभीर आरोप
कुलसचिव का आरोप है कि शिक्षा विभाग के विशेष सचिव ने बातचीत के दौरान उन्हें धमकी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी की ओर से उन्हें नुकसान पहुंचाने की बात कही गई।
कुलसचिव ने इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्च अधिकारियों से शिकायत की और कार्रवाई की मांग की।
उनका कहना है कि किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
निलंबन की मांग को लेकर धरना
आरोप के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
धरने पर बैठे लोगों की मांग है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए और उन्हें पद से हटाया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संस्थान में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब तक मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रह सकता है।
विश्वविद्यालय में बढ़ा तनाव
इस पूरे विवाद के कारण AKU का माहौल प्रभावित हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के बीच इस तरह का विवाद सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है।
छात्रों और कर्मचारियों पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
जांच की मांग तेज
मामले में अब निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
कुलसचिव की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के बयान, बातचीत से जुड़े तथ्य और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी होती है।
अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासनिक विवादों का असर
किसी भी विश्वविद्यालय में कुलसचिव और विभागीय अधिकारियों के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है।
कुलसचिव विश्वविद्यालय के प्रशासनिक संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं।
वहीं शिक्षा विभाग राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों की निगरानी करता है।
दोनों स्तरों के अधिकारियों के बीच विवाद होने पर संस्थान की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल
इस विवाद के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विश्वविद्यालयों में अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना विभाग की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे मामलों में विभाग को दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष निर्णय लेना होता है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है।
क्या है पूरा मामला?
फिलहाल विवाद की मुख्य वजह जांच समिति और उससे जुड़ी प्रक्रिया बताई जा रही है।
कुलसचिव का आरोप है कि जांच से जुड़े मुद्दे पर उन्हें धमकी दी गई।
वहीं पूरे मामले की सच्चाई सामने आने के लिए आधिकारिक जांच जरूरी है।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस स्तर पर लापरवाही हुई।
कर्मचारियों में नाराजगी
विश्वविद्यालय कर्मचारियों के एक वर्ग में इस घटना को लेकर नाराजगी है।
उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को मर्यादित व्यवहार करना चाहिए।
अगर किसी मुद्दे पर मतभेद हैं तो उन्हें नियमों और बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
धमकी या दबाव की स्थिति किसी भी संस्थान के लिए सही संदेश नहीं देती।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का इंतजार है।
यदि शिकायत पर जांच बैठाई जाती है तो संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जा सकता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन और मांगों का दौर जारी है।
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