बिहार

डाक पार्सल वैन में छिपाकर ले जाई जा रही थी शराब, 200 कार्टन के साथ दो गिरफ्तार

Kavita2
13 Sept 2026 4:51 PM IST
डाक पार्सल वैन में छिपाकर ले जाई जा रही थी शराब, 200 कार्टन के साथ दो गिरफ्तार
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लखीसराय। शराब की अवैध तस्करी के लिए कथित रूप से डाक पार्सल वैन का इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। शनिवार रात बड़हिया उत्पाद थाना और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़हिया प्रखंड मुख्यालय जाने वाली बाइपास सड़क पर एक संदिग्ध डाक पार्सल वैन को रोककर तलाशी ली। वैन से कुल 200 कार्टन में रखी 1792.44 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद की गई। जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है।

संयुक्त टीम ने वैन के चालक और उपचालक को मौके से गिरफ्तार कर लिया। दोनों से शराब की खेप के स्रोत, गंतव्य और इसे मंगाने वाले लोगों के संबंध में पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान चालक और उपचालक ने टीम को गुमराह करने का प्रयास किया। उनके अलग-अलग जवाबों की पुष्टि की जा रही है।

उत्पाद अधीक्षक दीपक कुमार सिंह की निगरानी में जब्त पार्सल वैन को संबंधित परिसर में ले जाया गया। यहां वैन से शराब के सभी कार्टन उतारकर उनकी गिनती की गई। अलग-अलग आकार की बोतलों और ब्रांड के आधार पर जब्त शराब का विवरण तैयार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक बरामद माल में इंपीरियल ब्लू और ओल्ड हैबिट ब्रांड की शराब शामिल है।

तलाशी के दौरान इंपीरियल ब्लू ब्रांड की 750 मिलीलीटर वाली बोतलों के 49 कार्टन मिले। इसी ब्रांड की 375 मिलीलीटर वाली बोतलों के 30 कार्टन और 180 मिलीलीटर वाली बोतलों के 21 कार्टन बरामद किए गए। इस प्रकार वैन में इंपीरियल ब्लू ब्रांड की शराब के कुल 100 कार्टन रखे थे।

वहीं ओल्ड हैबिट ब्रांड की 750 मिलीलीटर वाली बोतलों के चार कार्टन और 375 मिलीलीटर की बोतलों के 96 कार्टन मिले। इस ब्रांड के भी कुल 100 कार्टन बरामद किए गए। दोनों ब्रांडों को मिलाकर वैन से कुल 200 कार्टन शराब जब्त की गई। अधिकारियों ने पूरी खेप की मात्रा 1792.44 लीटर बताई है।

बताया जा रहा है कि पार्सल वैन के रूप में वाहन का इस्तेमाल इसलिए किया गया, ताकि रास्ते में किसी को उस पर आसानी से संदेह न हो। डाक अथवा पार्सल सेवा से जुड़े वाहनों की आवाजाही विभिन्न क्षेत्रों में सामान्य मानी जाती है। आशंका है कि इसी पहचान का फायदा उठाकर अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि वाहन वास्तव में किसी अधिकृत डाक या पार्सल एजेंसी से जुड़ा था या केवल ऐसी पहचान का इस्तेमाल किया गया, इसकी पुष्टि जांच के बाद होगी।

संयुक्त टीम अब वाहन के पंजीकरण, मालिक और उसके पूर्व परिवहन रिकॉर्ड की जानकारी जुटा रही है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि वैन का इस्तेमाल पहले किन वस्तुओं को ले जाने के लिए किया गया था। वाहन मालिक का गिरफ्तार चालक और उपचालक से क्या संबंध है, इस पहलू की भी पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों के सामने यह पता लगाना एक बड़ी चुनौती है कि शराब की खेप कहां से लोड की गई थी और उसे कहां उतारा जाना था। पूछताछ में गिरफ्तार दोनों आरोपितों ने कथित रूप से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय टीम को भ्रमित करने का प्रयास किया। ऐसे में उनके मोबाइल फोन, कॉल विवरण, जीपीएस रिकॉर्ड, टोल प्लाजा की जानकारी और रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

शराब की कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई है। हालांकि इसकी अंतिम कीमत बोतलों की संख्या, ब्रांड, बाजार मूल्य और विभागीय आकलन के आधार पर निर्धारित होगी। जब्त माल की सूची तैयार करने के बाद सभी कार्टनों को सुरक्षित रखा गया है। संबंधित कानून के तहत वाहन और शराब की खेप को जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध शराब की आपूर्ति के लिए विभिन्न प्रकार के वाहनों और सामान की आड़ लेने के मामले सामने आते रहे हैं। मालवाहक वाहन, फल-सब्जियों की गाड़ियां और पार्सल वैन जैसी पहचान का कथित इस्तेमाल इसलिए किया जाता है, ताकि सामान्य जांच के दौरान शराब की खेप आसानी से पकड़ में न आए। इस मामले में संदिग्ध वैन को समय रहते रोक लेने से बड़ी मात्रा में शराब बाजार तक पहुंचने से पहले जब्त कर ली गई।

संयुक्त कार्रवाई में स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण रही। बाइपास सड़क पर वाहनों की आवाजाही के बीच वैन को रोककर तलाशी ली गई। अंदर बड़ी संख्या में कार्टन मिलने के बाद चालक और उपचालक से उनके दस्तावेज मांगे गए। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और शराब बरामद होने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

अब अधिकारियों का ध्यान इस खेप के पीछे काम करने वाले कथित नेटवर्क तक पहुंचने पर है। केवल चालक और उपचालक की गिरफ्तारी से पूरी आपूर्ति शृंखला का पता नहीं चलता। शराब उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति, वाहन की व्यवस्था करने वाले लोग और खेप प्राप्त करने वाले संभावित कारोबारियों की पहचान भी आवश्यक होगी।

फिलहाल गिरफ्तार चालक और उपचालक से पूछताछ जारी है। दोनों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी। अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त सूचनाओं का सत्यापन करने के बाद इस मामले से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे

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