
Bihar: भोजपुर जिले में जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया द्वारा लगभग 150 कर्मचारियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए जाने के पांच दिन बाद भी कई कर्मचारियों ने अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान नहीं दिया है। इस स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानांतरण नियमावली के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, आदेश जारी होने के बावजूद कई कर्मचारी अब तक अपने पुराने कार्यालयों में ही कार्य कर रहे हैं। नए स्थान पर जॉइन नहीं करने से प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिलाधिकारी स्तर के आदेश का ही पालन नहीं हो रहा है, तो आम जनता की समस्याओं के समाधान की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
चुनाव आयोग और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार कर्मचारियों का नियमित अंतराल पर स्थानांतरण किया जाना आवश्यक है, ताकि प्रशासन में पारदर्शिता बनी रहे और किसी एक स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने की स्थिति न बने। लेकिन भोजपुर में कई कर्मचारी वर्षों से एक ही कार्यालय में कार्यरत बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि स्थानांतरण के बाद कुछ कर्मचारियों को डेपुटेशन या अन्य व्यवस्था के नाम पर फिर पुराने स्थान पर ही काम करने की अनुमति मिल जाती है, जिससे स्थानांतरण प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।
कुछ नागरिकों का कहना है कि जिले में ऐसे कर्मचारी भी हैं जो 10 से 15 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। इस पर मौलाबाग निवासी अवध बिहारी प्रसाद और शिवगंज के कौशल कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि लंबे समय से एक ही जगह रहने वाले कर्मचारियों की भूमिका और कार्यप्रणाली की जांच होनी चाहिए। लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से कुछ मामलों में अनियमितताओं की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्थानांतरण नीति का सख्ती से पालन जरूरी है।
जिलेवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन कर्मचारियों ने तय समय सीमा के भीतर नए पदस्थापन स्थल पर योगदान नहीं दिया है, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेशों को गंभीरता से लागू नहीं किया गया, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठते रहेंगे और प्रशासनिक सुधार का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।





