अशोक धाम मंदिर में देवघर की तर्ज पर होगा जलाभिषेक, देखें बड़े बदलाव

अशोक धाम मंदिर में देवघर की तर्ज पर होगा जलाभिषेक, देखें बड़े बदलाव
लखीसराय: बिहार के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में इस बार कांवड़ियों के जलाभिषेक की व्यवस्था देवघर की तर्ज पर की गई है। सावन की चौथी सोमवारी को उमड़ने वाली संभावित भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पिछले पांच दिनों से हाई अलर्ट मोड में है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था के लिए प्रशासन ने कई बड़े कदम उठाए हैं।
इस बार मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए लोहे के अरघा सिस्टम की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार की गई है। इसके जरिए श्रद्धालु भगवान शिव के शिवलिंग पर सीधे स्पर्श किए बिना जल अर्पित कर सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और जलाभिषेक की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी हो सकेगी।
सीसीटीवी और ड्रोन से होगी निगरानी
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। जिला प्रशासन ने बताया कि भीड़ की निगरानी के लिए चार दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा ड्रोन कैमरों के माध्यम से भी पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जाएगी।
मंदिर परिसर में बनाए गए कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जाएगी। अगर किसी स्थान पर अधिक भीड़ जमा होती है तो तुरंत कार्रवाई करते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा।
तीन बटालियन सुरक्षा बलों की तैनाती
सावन की चौथी सोमवारी को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की है। राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार तीन दर्जन से अधिक दंडाधिकारी और भारी संख्या में पुलिस जवान तैनात रहेंगे।
इसके अलावा अशोक धाम रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के लिए जीआरपी के 25 जवान और आरपीएफ के 15 जवानों की तैनाती की जाएगी। रेलवे स्टेशन से मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
ट्रेनों का होगा दो मिनट का ठहराव
कांवड़ियों की सुविधा को देखते हुए अशोक धाम रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी के अनुरोध पर दानापुर मंडल के डीआरएम ने अशोक धाम स्टेशन पर कई ट्रेनों के दो मिनट के ठहराव का निर्णय लिया है।
इससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में सुविधा होगी और स्टेशन पर भीड़ का दबाव कम किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था
प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को भी तैयार रखा है। वास्तु विहार कैंपस में दर्जनों बेड की व्यवस्था की गई है। यहां डॉक्टर, नर्स और मेडिकल टीम मौजूद रहेगी।
इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रास्तों की मरम्मत कराई गई है और जगह-जगह मजबूत बैरिकेडिंग की गई है, ताकि भीड़ को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
सुबह 3 बजे से लागू होंगे विशेष नियम
चौथी सोमवारी को लेकर प्रशासन ने सुबह तीन बजे से ही विशेष व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। दोपहर 12 बजे तक भीड़ की स्थिति को देखते हुए पूरे सिस्टम को नियंत्रित तरीके से चलाने की योजना बनाई गई है।
डीएम शैलेंद्र कुमार ने बताया कि विभिन्न प्रखंडों से आए अधिकारियों, मजिस्ट्रेट और पुलिस बल को रूटिंग वर्क की जिम्मेदारी दी गई है। कुल 47 विभागों के अधिकारी और कर्मी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल रहेंगे, जो वॉक-टॉकी के माध्यम से पल-पल की जानकारी साझा करेंगे।
भगदड़ रोकने के लिए बनाया गया खास प्लान
एसपी प्रेरण कुमार ने बताया कि मंदिर परिसर में कहीं भी अत्यधिक भीड़ या भगदड़ जैसी स्थिति बनने पर तैनात अधिकारी तुरंत सक्रिय होंगे। श्रद्धालुओं को अलग-अलग पॉइंट पर रोककर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए अलग-अलग रूट तैयार किए हैं और हर स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।
पिछली घटना से लिया सबक
अशोक धाम मंदिर में इस बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन इसलिए भी ज्यादा सतर्क है क्योंकि पिछले साल जलाभिषेक के दौरान भगदड़ की दुखद घटना हुई थी। 17 अगस्त को अचानक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी।
बताया गया कि उस समय करीब 50 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान बिजली का करंट फैलने की अफवाह के बाद भगदड़ मच गई थी। हादसे में सात महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि करीब 25 श्रद्धालु घायल हुए थे।
इस घटना के बाद प्रशासन ने इस बार पहले से ही भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और आपात सेवाओं को लेकर व्यापक योजना तैयार की है। अब चौथी सोमवारी पर प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सकें।





