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पटना। बिहार में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों में तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई है। कई जगह कटाई के लिए तैयार धान पानी में भीग गया है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। अक्टूबर के अंतिम दिनों में हुई इस बारिश ने खरीफ फसलों के साथ आगामी रबी फसलों की बुवाई को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सीतामढ़ी और मधुबनी में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, कई अन्य जिलों में तेज बारिश, आंधी और वज्रपात की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 31 अक्टूबर से कुछ इलाकों में बारिश की तीव्रता कम हो सकती है, लेकिन पूरी तरह राहत मिलने में अभी समय लग सकता है।
तेज हवा और बारिश से खेतों में गिरी धान की फसल
बिहार में धान की कटाई का समय चल रहा है। कई जिलों में फसल पककर तैयार हो चुकी है, जबकि कुछ क्षेत्रों में किसान कटाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे समय पर चक्रवाती मौसम के कारण हुई बारिश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
पटना, भागलपुर और आसपास के कई इलाकों में धान की खड़ी फसल गिरने की खबरें सामने आई हैं। तेज हवा के कारण पौधे जमीन पर झुक गए हैं। खेतों में पानी जमा होने से धान की बालियां भीगने और अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि गिरी हुई फसल की कटाई करना मुश्किल हो सकता है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो खेतों में अधिक समय तक नमी बने रहने से नुकसान और बढ़ सकता है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पटना और भागलपुर सहित 21 जिलों में फसलों के प्रभावित होने की खबर है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने क्षेत्र की फसल खराब हुई है।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अक्टूबर और नवंबर का समय काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कई क्षेत्रों में फसल तैयार होकर कटाई की स्थिति में पहुंचती है।किसान महीनों तक खेतों में मेहनत करते हैं और बीज, खाद, सिंचाई तथा मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। ऐसे में फसल पकने के बाद बेमौसम बारिश उनकी आर्थिक स्थिति पर असर डाल सकती है।बारिश के कारण जिन खेतों में धान गिर गया है, वहां कटाई में अतिरिक्त मजदूरी और समय लगने की आशंका है।इसके अलावा कटाई के बाद खेतों में रखी उपज बारिश में भीगने पर उसे सुखाने की अलग व्यवस्था करनी पड़ सकती है। अधिक नमी होने से अनाज के भंडारण और बिक्री में भी परेशानी आ सकती है।यदि फसल की गुणवत्ता खराब होती है, तो किसानों को बाजार में उचित कीमत हासिल करने में कठिनाई हो सकती है।
पटना में तापमान में भारी गिरावट
चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से बिहार में केवल बारिश ही नहीं हुई, बल्कि तापमान में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है।पटना में गुरुवार को बारिश और बादलों के कारण अधिकतम तापमान सामान्य से करीब नौ डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया।बारिश और ठंडी हवाओं के कारण अक्टूबर के अंतिम दिनों में ही लोगों को हल्की ठंड का अहसास होने लगा है।पटना के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी तापमान में कमी दर्ज की गई। लगातार बादल छाए रहने से दिन में धूप कम निकल रही है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, चक्रवाती प्रणाली के प्रभाव से वातावरण में नमी बढ़ी है, जिससे व्यापक स्तर पर बारिश की स्थिति बनी।
सीतामढ़ी और मधुबनी में रेड अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र पटना ने शुक्रवार को सीतामढ़ी और मधुबनी जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।वहीं, दरभंगा, शिवहर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।इन इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी और वज्रपात की संभावना बनी हुई है। हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।इसके अलावा पटना समेत कई अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और वज्रपात की आशंका होने पर खुले मैदानों तथा पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचने की सलाह दी है।
31 अक्टूबर से कुछ राहत मिलने की उम्मीद
मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में 31 अक्टूबर तक बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव बना रह सकता है।हालांकि, शनिवार से कुछ इलाकों में चक्रवाती प्रणाली का प्रभाव कमजोर होने के संकेत हैं।इसके बावजूद उत्तर बिहार के कई जिलों में बारिश जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, एक से दो नवंबर के बीच बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है।मौसम साफ होने के बाद सुबह और शाम के तापमान में ठंडक बढ़ने की संभावना है।इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम पूरी तरह अनुकूल होने के बाद ही कटाई और बुवाई से जुड़ा काम शुरू करें।
रबी फसलों की बुवाई में भी हो सकती है देरी
अर्नब तूफान के कारण हुई बारिश से खरीफ फसलों के साथ रबी सीजन की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं।धान की कटाई के बाद कई किसान गेहूं, सरसों, चना और अन्य रबी फसलों की बुवाई शुरू करते हैं।लेकिन खेतों में पानी जमा होने और मिट्टी में अधिक नमी रहने के कारण बुवाई में देरी हो सकती है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बारिश से खेतों में जलभराव होने पर मिट्टी तैयार करना मुश्किल हो जाता है।ऐसी स्थिति में किसानों को खेत सूखने का इंतजार करना पड़ सकता है। इससे अगली फसल की बुवाई का समय प्रभावित होने की आशंका है।मौसम की स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फिलहाल सरसों, चना, आलू और अन्य सर्दियों की फसलों की बुवाई टालने की सलाह दी है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दी जरूरी सलाह
मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को तैयार फसल सुरक्षित रखने के लिए सावधानी बरतने को कहा है।जिन किसानों की धान की कटाई हो चुकी है, उन्हें उपज सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। खुले में रखे धान को तिरपाल से ढकना चाहिए, ताकि बारिश का पानी सीधे उस पर न गिरे।इसके अलावा खेतों में जमा पानी की निकासी की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।तेज बारिश और आंधी के दौरान किसानों को खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इस दौरान बिजली गिरने का खतरा रहता है।मौसम अनुकूल होने के बाद फसल की स्थिति देखकर आगे की कृषि गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।
फसलों के नुकसान के आकलन पर टिकी निगाहें
फिलहाल किसानों की सबसे बड़ी चिंता बारिश से खराब हुई फसल के नुकसान की भरपाई को लेकर है।धान की कटाई से ठीक पहले हुई बारिश के कारण किसानों को अपनी मेहनत और निवेश के नुकसान की आशंका सता रही है।हालांकि, अब तक प्रभावित फसल का कुल क्षेत्रफल और आर्थिक नुकसान का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और कृषि विभाग के आकलन से नुकसान की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल बिहार के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। उन्हें उम्मीद है कि बारिश का दौर जल्द समाप्त होगा, जिससे बची हुई फसल को सुरक्षित किया जा सकेगा।
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