
Bihar: समस्तीपुर में इमारत-ए-शरिया द्वारा आयोजित दावत व इस्लाह यात्रा के समापन पर युवाओं और अभिभावकों से अपील की गई कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा को भी अपनाएं। संस्था ने कहा कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक सुधार और चरित्र निर्माण में धार्मिक शिक्षा की अहम भूमिका होती है।
शिक्षा और जागरूकता अभियान जारी
इमारत-ए-शरिया बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को लेकर लगातार अभियान चला रही है। संस्था का मानना है कि आधुनिक शिक्षा और धार्मिक समझ का संतुलन ही बेहतर समाज के निर्माण में मदद करता है।
10 से 17 जून तक चला कार्यक्रम
समस्तीपुर जिले में 10 जून से 17 जून 2026 तक दावत व इस्लाह यात्रा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी के मार्गदर्शन और नाजिम इमारत-ए-शरिया के निर्देश पर संपन्न हुआ।
विभिन्न क्षेत्रों में चला जागरूकता अभियान
मौलाना कमर अनीस कासमी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान धार्मिक जागरूकता, सामाजिक सुधार, पारिवारिक जीवन और नैतिक मूल्यों पर चर्चा की गई।
युवाओं के लिए दोहरी शिक्षा पर जोर
समापन कार्यक्रम में कहा गया कि युवाओं को आधुनिक और तकनीकी शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा भी प्राप्त करनी चाहिए। इससे वे समाज और देश के लिए बेहतर भूमिका निभा सकेंगे।
अभिभावकों की जिम्मेदारी पर बल
संस्था ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी दें। कुरआन, हदीस और नैतिक मूल्यों की शिक्षा को चरित्र निर्माण का आधार बताया गया।
समाज सुधार का लक्ष्य
इमारत-ए-शरिया ने कहा कि धार्मिक शिक्षा व्यक्ति को गलत रास्तों से बचाती है और समाज में नैतिक सुधार लाती है। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को संतुलित और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।





