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बिहार के सभी जिला अस्पतालों में 7 दिन में ICU

Kavita2
12 July 2026 9:25 AM IST
बिहार के सभी जिला अस्पतालों में 7 दिन में ICU
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पटना : बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और मरीजों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के कार्यभार संभालने के बाद स्वास्थ्य विभाग लगातार सुधारात्मक फैसले ले रहा है। इसी क्रम में विभाग ने सभी जिला अस्पतालों में सात दिनों के भीतर आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया है। इसके साथ ही मरीजों को बिना उचित और पर्याप्त कारण के बड़े अस्पतालों या उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने पर भी सख्ती बरतने का फैसला लिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और मरीजों को उनके जिले में ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी जिलों के अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी ताकि लोगों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से दूर के अस्पतालों का रुख न करना पड़े।

जारी निर्देश के अनुसार, बिहार के सभी जिला अस्पतालों में सात दिनों के भीतर आईसीयू की व्यवस्था स्थापित करने या उसे पूरी तरह क्रियाशील बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि गंभीर मरीजों का समय पर उपचार किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया को लेकर भी नया दिशा-निर्देश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि किसी भी मरीज को केवल औपचारिकता के आधार पर उच्च चिकित्सा संस्थान या मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर नहीं किया जाएगा। यदि जिला अस्पताल या संबंधित सरकारी अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों से उपचार संभव है तो मरीज का इलाज वहीं किया जाएगा।

विभाग ने कहा है कि केवल उन्हीं मामलों में मरीजों को रेफर किया जाएगा, जहां वास्तव में विशेष उपचार, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा या विशेषज्ञ सेवाओं की आवश्यकता होगी और स्थानीय स्तर पर उसका प्रबंध उपलब्ध नहीं होगा। रेफर करने से पहले चिकित्सकों को उचित कारण दर्ज करना होगा ताकि अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाई जा सके।

सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में मरीज सामान्य या नियंत्रित होने योग्य मामलों में भी मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में भेज दिए जाते हैं, जिससे वहां मरीजों का अत्यधिक दबाव बढ़ जाता है। इसके कारण गंभीर रोगियों को समय पर इलाज मिलने में कठिनाई होती है। नई व्यवस्था लागू होने से जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ेगी और बड़े अस्पतालों पर भी अनावश्यक बोझ कम होगा।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया है कि उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, जांच सुविधाओं और अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाए। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिकों को अपने जिले के निकटतम सरकारी अस्पताल में ही बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।

नई व्यवस्था से मरीजों और उनके परिजनों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। अक्सर गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों या विशेष अस्पतालों में रेफर किए जाने के कारण उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय, धन और मानसिक परेशानी बढ़ती है। यदि जिला अस्पतालों में ही बेहतर उपचार उपलब्ध होगा तो लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को यह भी निर्देश दिया है कि आईसीयू सेवाओं के संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त उपकरणों की व्यवस्था, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही आईसीयू की नियमित निगरानी और संचालन की समीक्षा भी की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिला अस्पतालों में आईसीयू सेवाएं प्रभावी ढंग से संचालित होती हैं और रेफरल प्रणाली को व्यवस्थित किया जाता है तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। इससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के नेतृत्व में विभाग द्वारा हाल के दिनों में कई सुधारात्मक पहल की जा रही हैं। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए भविष्य में भी आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बिहार के प्रत्येक नागरिक को अपने जिले में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों और केवल विशेष परिस्थितियों में ही मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाए। विभाग को उम्मीद है कि नए निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।

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