बिहार

कागजों पर बच्चों को खिलाया खाना, पत्नी को बनाया वेंडर, हेडमास्टर पर कार्रवाई

Saba Naaz
17 July 2026 2:31 PM IST
कागजों पर बच्चों को खिलाया खाना, पत्नी को बनाया वेंडर, हेडमास्टर पर कार्रवाई
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सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। सोनबरसा प्रखंड के मध्य विद्यालय बसहिया हिंदी में निरीक्षण के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। आरोप है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने अपनी पत्नी को ही मध्याह्न भोजन योजना का वेंडर बना दिया और बच्चों की वास्तविक संख्या से अधिक उपस्थिति दिखाकर भोजन योजना में गड़बड़ी की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा है।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मध्याह्न भोजन योजना सुजीत कुमार दास ने प्रधानाध्यापक को 24 घंटे के भीतर सभी आरोपों पर साक्ष्य सहित जवाब देने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया और जांच में आरोप सही साबित हुए तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, नौ जुलाई को जिला लेखापाल की ओर से विद्यालय का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान विद्यालय में दर्ज आंकड़ों और मौके पर मौजूद छात्रों की संख्या में बड़ा अंतर पाया गया। निरीक्षण के समय कक्षा एक से पांच तक 88 और कक्षा छह से आठ तक 104 छात्र उपस्थित थे। यानी कुल 192 बच्चे विद्यालय में मौजूद थे। वहीं, पिछले छह दिनों की औसत उपस्थिति रजिस्टर में 283 छात्रों की दर्ज की गई थी।

विभागीय जांच में सामने आया कि विद्यालय के रिकॉर्ड और ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में भी अंतर था। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच ऑनलाइन नामांकन और मध्याह्न भोजन योजना के लाभार्थी छात्रों की संख्या में विसंगतियां मिलीं। विभाग ने इस मामले में विस्तृत जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है।

सबसे गंभीर आरोप मध्याह्न भोजन योजना के वेंडर चयन को लेकर सामने आया है। जांच में पाया गया कि जिस रितु देवी को विद्यालय में एमडीएम वेंडर बनाया गया है, वह प्रधानाध्यापक की पत्नी हैं। विभाग के अनुसार, उनके माध्यम से एक महीने में 53,873 रुपये का भुगतान किया गया है। अधिकारियों ने इस भुगतान और वेंडर चयन की प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है।

इसके अलावा राहुल किराना स्टोर्स के नाम से जमा किए गए बिलों की भी जांच की जा रही है। विभाग ने विद्यालय से वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में प्राप्त राशि के उपयोग का पूरा विवरण मांगा है। इसके साथ ही बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक, खर्च का ब्योरा, पोषाहार पंजी, चखना पंजी, वेंडर भुगतान से जुड़े दस्तावेज और बच्चों की उपस्थिति रजिस्टर भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि, निरीक्षण के दौरान विद्यालय के छात्रों और सहायक शिक्षकों ने बताया कि स्कूल में मध्याह्न भोजन योजना के तहत मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों को नियमित रूप से भोजन के अलावा अंडा और फल भी दिए जाते हैं। इसके बावजूद रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ी ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है। ऐसे में रिकॉर्ड में हेरफेर या सरकारी राशि के गलत इस्तेमाल की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुजीत कुमार दास ने कहा कि निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लिया गया है। प्रधानाध्यापक से सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

फिलहाल शिक्षा विभाग की जांच जारी है। अब यह देखना होगा कि प्रधानाध्यापक की ओर से दिए गए जवाब और दस्तावेजों की जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलता है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता के तहत भी कदम उठाए जा सकते हैं।

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