बिहार

ITC मिशन सुनहरा कल से मखाना किसानों को मिलेगा नया संबल

Kavita2
17 July 2026 2:22 PM IST
ITC मिशन सुनहरा कल से मखाना किसानों को मिलेगा नया संबल
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पटना: बिहार के मखाना उत्पादकों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक वैज्ञानिक एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से आईटीसी के 'मिशन सुनहरा कल' कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत मखाना की वैज्ञानिक खेती, आधुनिक प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और बेहतर बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आमदनी दोनों में वृद्धि करना है।

आईटीसी के इस कार्यक्रम के तहत फिलहाल बिहार के प्रमुख मखाना उत्पादक जिलों—दरभंगा, मधुबनी और कटिहार—में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इन जिलों में अब तक 2,500 से अधिक किसान इस पहल से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा कई महिला संचालित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम कर रहे हैं।

मखाना बिहार की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और इसकी देश-विदेश में लगातार मांग बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने, बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन करने और बाजार तक सीधी पहुंच दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

मिशन सुनहरा कल के अंतर्गत किसानों को खेती के हर चरण की वैज्ञानिक जानकारी दी जा रही है। इसमें खेतों की तैयारी, बीज उपचार, पौधों की देखभाल, संतुलित पोषण, जल प्रबंधन और रोग नियंत्रण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विशेषज्ञ किसानों को यह भी बता रहे हैं कि आधुनिक तकनीक अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम के तहत जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि मखाना की खेती पूरी तरह जलाशयों और तालाबों पर निर्भर होती है। किसानों को पानी के बेहतर उपयोग और फसल के अनुकूल जल स्तर बनाए रखने की तकनीक सिखाई जा रही है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

इसके अलावा किसानों को आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों की जानकारी भी दी जा रही है। पारंपरिक तरीकों की तुलना में आधुनिक प्रोसेसिंग से मखाना की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में इसकी कीमत भी अधिक मिलती है। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू किसानों को बाजार से सीधे जोड़ना भी है। अक्सर छोटे किसान अपनी उपज उचित मूल्य पर नहीं बेच पाते। मिशन सुनहरा कल के माध्यम से किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था, खरीदारों तक पहुंच और मूल्य संवर्धन की जानकारी दी जा रही है, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल सके।

महिला किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी इस कार्यक्रम की खास विशेषता मानी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं भी मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़ी रहती हैं। ऐसे में उन्हें संगठित कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हैं तो मखाना उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। साथ ही गुणवत्ता में सुधार होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बिहार के मखाना की मांग और बढ़ेगी।

बिहार देश में सबसे अधिक मखाना उत्पादन करने वाला राज्य है। राज्य के कई जिलों में हजारों किसान इस फसल पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं। ऐसे में वैज्ञानिक खेती और आधुनिक विपणन व्यवस्था से जुड़ी यह पहल किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती है।

आईटीसी का कहना है कि मिशन सुनहरा कल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आजीविका को मजबूत करने और कृषि को टिकाऊ बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके माध्यम से किसानों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस मॉडल को अन्य मखाना उत्पादक जिलों तक भी विस्तारित किया जाता है तो इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलेगा और बिहार के मखाना उद्योग को नई गति मिलेगी।

कुल मिलाकर, आईटीसी का मिशन सुनहरा कल कार्यक्रम बिहार के मखाना किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। वैज्ञानिक खेती, आधुनिक तकनीक, महिला सशक्तिकरण और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और मखाना उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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