बिहार

रिश्वत मामले में पूर्व SI पूनम कुमारी को 3 साल की सजा

Kavita2
23 Jun 2026 4:46 PM IST
रिश्वत मामले में पूर्व SI पूनम कुमारी को 3 साल की सजा
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Bihar बिहार: भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में पटना की विशेष सतर्कता अदालत ने पूर्व सब-इंस्पेक्टर पूनम कुमारी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

यह मामला हाजीपुर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां एक बस मालिक से रिश्वत लेने और मांगने के आरोप में तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उन्हें दोषी पाया गया। यह फैसला विशेष सतर्कता अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सुनाया।

मामले के अनुसार, आरोप था कि दुर्घटनाग्रस्त बस की मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) रिपोर्ट को आगे बढ़ाने और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बदले में रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता बस मालिक ने आरोप लगाया था कि उनसे पहले 20 हजार रुपये नकद और एक एलईडी टीवी की मांग की गई थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, यह मांग केवल एक बार नहीं की गई बल्कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लगातार अतिरिक्त रकम और टीवी की मांग की जाती रही। आरोप है कि कुछ राशि पहले ही ले ली गई थी, लेकिन शेष रकम और टीवी की मांग जारी रही, जिससे पीड़ित परेशान हो गया और उसने मामले की शिकायत संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से की।

शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई और जांच के दौरान आरोपों को गंभीर पाया गया। इसके बाद पूर्व सब-इंस्पेक्टर पूनम कुमारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस विभाग जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और इससे जनता का विश्वास व्यवस्था पर कमजोर होता है। ऐसे मामलों में सख्त सजा देना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

इस फैसले के बाद पूरे प्रशासनिक और पुलिस विभाग में हलचल देखी जा रही है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर लगातार हो रही सख्त कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल दोषी के लिए बल्कि अन्य अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है।

वहीं, पीड़ित पक्ष ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि उन्हें न्याय मिलने में समय जरूर लगा, लेकिन अंततः सच सामने आया और दोषी को सजा मिली। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है।

दूसरी ओर, कानूनी जानकारों का कहना है कि भ्रष्टाचार निवारण मामलों में सजा का यह स्तर यह दर्शाता है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही है। उनका मानना है कि अगर समय पर शिकायत और जांच हो तो ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई संभव है।

यह मामला अब राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में भी इस फैसले की चर्चा है और इसे एक सख्त संदेश के तौर पर माना जा रहा है कि कानून के दायरे में कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता।

फिलहाल, अदालत के इस फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपील की संभावना पर भी नजर बनी हुई है।

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