
पटना/बेतिया। बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत देने को लेकर सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व से पहले ही बाढ़ पीड़ितों के बैंक खातों में सहायता राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी। इसके साथ ही बाढ़ के कारण फसल गंवाने वाले किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
डॉ. संजय जायसवाल ने यह जानकारी शुक्रवार को नगर के अस्पताल रोड स्थित अपने आवास पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना प्राथमिकता है। सरकार और प्रशासन के स्तर पर प्रभावित लोगों की पहचान तथा नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया जारी है।
सांसद ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को मिलने वाली सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि राहत राशि के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी होते ही लाभार्थियों को भुगतान किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दशहरा पर्व से पहले पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता मिल जाएगी, जिससे आपदा के बाद उन्हें कुछ राहत मिल सके।
बाढ़ के कारण केवल घरों और सार्वजनिक संपत्तियों को ही नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि बड़ी संख्या में किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। खेतों में पानी भरने और फसलों के खराब होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा हुआ है। इसे देखते हुए फसल क्षति का विस्तृत आंकलन कराया जा रहा है।
डॉ. जायसवाल ने बताया कि करीब दस साल के अंतराल के बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की फिर से शुरुआत की गई है। फिलहाल कृषि विभाग की ओर से फसल क्षति की विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। इस सूची में बाढ़ से प्रभावित किसानों और उनकी फसलों से संबंधित जानकारी शामिल की जाएगी। इसके आधार पर पात्र किसानों को योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान के खिलाफ किसानों को वित्तीय सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है। केंद्र सरकार के अनुसार इस योजना के दायरे में बाढ़, सूखा, चक्रवात, ओलावृष्टि, कीट और बीमारियों जैसी परिस्थितियों से होने वाले निर्धारित नुकसान शामिल हैं।
कृषि विभाग द्वारा तैयार की जा रही फसल क्षति सूची इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसी के आधार पर प्रभावित किसानों की पहचान और उनके नुकसान का आकलन किया जाएगा। खेतवार तथा फसलवार जानकारी जुटाए जाने के बाद बीमा से जुड़े दावों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
सांसद ने कहा कि बाढ़ के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता अपनी फसल और आय को लेकर है। कई किसान खेती पर पूरी तरह निर्भर हैं और फसल खराब होने का सीधा असर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। ऐसे में फसल बीमा के माध्यम से मिलने वाली सहायता उनके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने कहा कि राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया में किसी पात्र प्रभावित व्यक्ति को छूटने नहीं दिया जाना चाहिए। प्रशासन को फसल क्षति का सही रिकॉर्ड तैयार करने और वास्तविक प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने पर ध्यान देना होगा। बाढ़ प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन जितनी जल्दी पूरा होगा, उतनी ही तेजी से सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पिछले वर्षों के दौरान करोड़ों किसान आवेदन बीमित किए गए हैं और बड़ी राशि के दावों का भुगतान किया गया है। योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और अन्य निर्धारित जोखिमों से फसल नुकसान होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहारा देना है।
डॉ. जायसवाल ने बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल राहत के साथ-साथ किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद सिर्फ तत्काल सहायता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन किसानों की पूरी फसल नष्ट हो गई है, उनके नुकसान की भरपाई के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाना चाहिए।
सांसद के मुताबिक कृषि विभाग अभी प्रभावित क्षेत्रों का विवरण तैयार कर रहा है। खेतों में फसल की स्थिति, नुकसान का स्तर और प्रभावित किसानों से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट होगी और संबंधित योजना के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बाढ़ के दौरान कई इलाकों में खेती को भारी नुकसान होने की आशंका है। जलभराव से खेतों में खड़ी फसल खराब होने के साथ कृषि कार्य भी प्रभावित हुए हैं। किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए भी आर्थिक संसाधनों की जरूरत होगी। ऐसे में समय पर मिलने वाली सहायता उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
राहत राशि को बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था को लेकर सांसद ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि पात्र लाभार्थियों को सीधे आर्थिक सहायता मिले। इससे राहत वितरण की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है और प्रभावित परिवारों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि राहत कार्यों में प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी होनी चाहिए। बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति, नुकसान का आंकलन और राहत वितरण की प्रक्रिया पर संबंधित विभागों को नजर रखनी होगी। उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों से प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान में तेजी लाने की अपील की।
बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए दशहरा से पहले सहायता राशि मिलने की उम्मीद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहार के दौरान परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव रहता है। आपदा से प्रभावित परिवार पहले ही आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं। ऐसे में बैंक खाते में मिलने वाली सहायता उन्हें जरूरी खर्च पूरा करने में कुछ राहत दे सकती है।
किसानों के मामले में भी फसल बीमा योजना की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। केंद्र सरकार के अनुसार पीएमएफबीवाई को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए लागू किया जाता है और इसमें बाढ़ समेत कई जोखिमों का कवरेज शामिल है।
सांसद ने कहा कि कृषि विभाग की फसल क्षति सूची तैयार होने के बाद किसानों को उनके नुकसान के मुताबिक योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और वास्तविक नुकसान का सही आकलन करने पर जोर दिया।
फिलहाल बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रशासनिक स्तर पर काम जारी है। एक तरफ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में राहत राशि भेजने की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कृषि विभाग फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत ब्योरा जुटा रहा है।
डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को राहत देना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस दिशा में हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दशहरा से पहले सहायता राशि ट्रांसफर करने का प्रयास है और किसानों को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सहायता दिलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि करीब दस साल के अंतराल के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना की दोबारा शुरुआत हुई है। अब कृषि विभाग की रिपोर्ट आने के बाद प्रभावित किसानों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। बाढ़ से प्रभावित परिवारों और किसानों को मिलने वाली सहायता की तस्वीर आने वाले दिनों में फसल क्षति के आंकलन और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद और स्पष्ट होगी।
फिलहाल बाढ़ पीड़ितों के बैंक खातों में सहायता राशि भेजने की तैयारी और फसल क्षति की सूची तैयार करने का काम जारी है। सांसद के मुताबिक सरकार का उद्देश्य है कि प्रभावित परिवारों को दशहरा से पहले आर्थिक सहायता मिले और फसल गंवाने वाले किसानों को बीमा योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा सके।





