बिहार

पटाखा दुकानें बंद, चोरी-छिपे कारोबार पर प्रशासन सख्त

Rajeshwari Nishad
25 Oct 2026 6:08 PM IST
पटाखा दुकानें बंद, चोरी-छिपे कारोबार पर प्रशासन सख्त
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पटना। बिहार के सिवान जिले में अवैध पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण विस्फोट में पांच लोगों की मौत के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। दीपावली से पहले पटाखों की खरीद-बिक्री, भंडारण और सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसका असर पटना सिटी के पटाखा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। सामान्य दिनों में खुली रहने वाली कई पटाखा दुकानें शनिवार को बंद नजर आईं। हालांकि, सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ दुकानदार पिछले दरवाजे से बिक्री कर रहे हैं और ग्राहकों के ऑर्डर पर घर या आयोजन स्थल तक पटाखे पहुंचाए जा रहे हैं।
पटना सिटी में पटाखों की छोटी-बड़ी करीब 45 दुकानें हैं। दीपावली नजदीक आने पर अस्थायी दुकानों के खुलने से इनकी संख्या बढ़कर लगभग 150 तक पहुंच जाती है। ऐसे में त्योहार से पहले पटाखों के कारोबार पर नजर रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
सिवान में पांच मौतों के बाद बढ़ी चिंता
सिवान जिले के आलमपुर गांव में 23 अक्टूबर 2026 को पटाखे बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई। विस्फोट इतना जोरदार था कि मकान को भारी नुकसान पहुंचा और राहत-बचाव अभियान के दौरान पुलिस तथा प्रशासन की टीमों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी।
घटना के बाद सिवान जिला प्रशासन ने अवैध पटाखा निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों को संदिग्ध ठिकानों की जांच करने और बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस हादसे ने यह चिंता भी बढ़ाई है कि त्योहार के दौरान अधिक मुनाफा कमाने के लिए कहीं पटाखों का असुरक्षित भंडारण या अवैध निर्माण तो नहीं किया जा रहा है। पटाखों में इस्तेमाल होने वाली विस्फोटक सामग्री को गलत तरीके से रखने पर आग और विस्फोट का खतरा बढ़ सकता है।
पटना सिटी में करीब 150 दुकानों तक पहुंचती है संख्या
पटना सिटी में पटाखों का कारोबार दीपावली के आसपास तेजी से बढ़ता है। सामान्य दिनों में यहां करीब 45 छोटी-बड़ी दुकानें संचालित होती हैं, लेकिन त्योहार करीब आते ही अस्थायी दुकानें भी खुल जाती हैं। इससे दुकानों की संख्या बढ़कर लगभग 150 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।
दुकानों की संख्या बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती भी बढ़ जाती है कि
पटाखों
की बिक्री निर्धारित नियमों के अनुसार हो। इसके लिए दुकानों के लाइसेंस, भंडारण की स्थिति और सुरक्षा मानकों की जांच महत्वपूर्ण है।
सिवान की घटना के बाद पटना सिटी में भी पटाखा कारोबार पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। बाजार में शनिवार को कई दुकानें बंद दिखाई दीं। हालांकि, केवल दुकानें बंद होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी दुकानदारों ने बिक्री रोक दी है।
पिछले दरवाजे से बिक्री की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, पटाखा बाजार में कुछ दुकानदार खुले तौर पर दुकानें बंद रखने के बावजूद ग्राहकों से संपर्क बनाए हुए हैं। दावा किया जा रहा है कि ग्राहकों से ऑर्डर लेकर घरों या आयोजन स्थलों तक पटाखे पहुंचाए जा रहे हैं।
यदि ऐसा हो रहा है, तो प्रशासन के सामने अवैध बिक्री पर निगरानी रखने की चुनौती और बढ़ सकती है। बंद दुकानों के पीछे से होने वाले कारोबार की पुष्टि के लिए जांच और निरीक्षण जरूरी होगा। फिलहाल इस तरह की बिक्री के सभी मामलों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे सूत्रों का दावा ही माना जाना चाहिए।
पटाखों की खरीद-बिक्री में सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है। निर्धारित अनुमति के बिना भंडारण या बिक्री होने पर संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए दुकानदारों को आवश्यक दस्तावेज और लाइसेंस उपलब्ध रखने चाहिए।
सिवान में छापेमारी, कई दुकानें और गोदाम सील
सिवान में विस्फोट के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शनिवार को करीब 30 पटाखा दुकानों की जांच की। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान कई दुकानों और गोदामों को सील किया गया। अधिकारियों ने लाइसेंस, पटाखों के स्टॉक, भंडारण की व्यवस्था और कारोबार से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की।
इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध भंडारण और बिक्री को रोकना तथा सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। प्रशासन ने बिना लाइसेंस पटाखों का निर्माण, भंडारण या बिक्री करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सिवान की घटना के बाद पटाखों के कारोबार में सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में दूसरे शहरों में भी प्रशासनिक निगरानी और जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
दीपावली से पहले सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
दीपावली के दौरान पटाखों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में दुकानों और गोदामों में पटाखों का सुरक्षित भंडारण बेहद जरूरी है। रिहायशी इलाकों, संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में विस्फोटक सामग्री रखने से जोखिम बढ़ सकता है।
प्रशासन के सामने एक ओर पटाखों की अवैध बिक्री पर रोक लगाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत काम करने का अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
पटना सिटी में दुकानों के बंद रहने और पिछले दरवाजे से बिक्री के दावों के बीच अब निगरानी की प्रभावशीलता महत्वपूर्ण होगी। जांच के जरिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पटाखों की खरीद-बिक्री और भंडारण नियमों के अनुसार हो।
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