
सीवान: देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में बिहार के सीवान सदर अस्पताल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। राज्य में केवल दो संस्थानों—आईजीआईएमएस, पटना और सीवान सदर अस्पताल—को आरटी-पीसीआर आधारित टीबी जांच परियोजना के लिए चुना गया है। इस नई तकनीक से बिना स्पष्ट लक्षण वाले संभावित मरीजों की भी शुरुआती चरण में पहचान संभव हो सकेगी, जिससे टीबी नियंत्रण अभियान को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सीवान सदर अस्पताल में आधुनिक क्वांटिप्लस एमटीबी फास्ट डिटेक्शन किट उपलब्ध कराई गई है। यह आरटी-पीसीआर तकनीक टीबी बैक्टीरिया की तेजी और अधिक सटीकता से पहचान करने में सक्षम मानी जाती है। खास बात यह है कि अब ऐसे मरीजों की भी जांच संभव होगी जिनमें शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं हैं, जिससे संक्रमण का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। इस परियोजना के लिए सीडीसी (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल), नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने 16 अप्रैल को अस्पताल की आरटी-पीसीआर लैब का निरीक्षण किया था और इसे उपयुक्त पाया था। इसके बाद अस्पताल को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया। परियोजना के संचालन के लिए दो लैब तकनीशियनों की तैनाती की गई है और दो अल्ट्रा-पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें भी दी गई हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीबी स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि लैब कर्मियों का विशेष प्रशिक्षण 2 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद लगभग 10 दिनों के भीतर सीवान सदर अस्पताल में टीबी जांच की नई सुविधा शुरू होने की संभावना है। इस परियोजना में विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन भी तकनीकी सहयोग दे रहा है। हालांकि जांच शुरू होने से पहले ही लैब के प्रशिक्षित तकनीशियन प्रदीप कुमार का आईसीयू में स्थानांतरण किए जाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग में चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदीप कुमार कोरोना काल से आरटी-पीसीआर लैब का संचालन कर रहे थे और उन्हें विशेष प्रशिक्षण भी मिला हुआ है। सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि फिलहाल आईसीयू सेवाएं प्राथमिकता में हैं, लेकिन जांच शुरू होते ही प्रशिक्षित तकनीशियन को पुनः लैब में भेज दिया जाएगा। साथ ही आईसीयू के लिए अन्य लैब से व्यवस्था की जाएगी।
सीडीओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह तकनीक टीबी की शुरुआती पहचान में मदद करेगी और संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से टीबी उन्मूलन अभियान को गति मिलेगी और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।





