
बिहार: गांवों के विकास के लिए शुरू की गई सांसद आदर्श ग्राम योजना अब कमजोर स्थिति में पहुंचती दिख रही है। पिछले 10 वर्षों में योजना के तहत चुनी गई 208 पंचायतों में से केवल 117 पंचायतों के लिए ही विकास योजनाएं तैयार हो सकी हैं। कुल 6265 प्रोजेक्ट्स में से सिर्फ 2083 काम ही पूरे हो पाए हैं। धीमी प्रगति को देखते हुए सरकार अब इस योजना को बंद करने पर विचार कर रही है और सभी जिलों से अंतिम रिपोर्ट मांगी गई है।
वर्ष 2014 से 2024 के बीच लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने 208 पंचायतों को आदर्श ग्राम के रूप में चुना था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार बेहद धीमी रही। इनमें से कई पंचायतों में अब तक विकास कार्य शुरू भी नहीं हो सके।
पहले चरण (2014–2019) में 81 पंचायतों को चुना गया था, जिनमें से 60 पंचायतों के लिए ही योजनाएं बन पाईं। इस दौरान 4824 प्रोजेक्ट तय किए गए थे, लेकिन सिर्फ 1897 काम ही पूरे हो पाए। लगभग 48.61 प्रतिशत कार्य शुरू ही नहीं हो सके।
दूसरे चरण (2019–2024) में 127 पंचायतों को शामिल किया गया, लेकिन केवल 57 पंचायतों के लिए ही विकास योजनाएं बन सकीं। इस अवधि में 1441 प्रोजेक्ट्स में से मात्र 186 काम पूरे हो पाए, जबकि 1107 प्रोजेक्ट्स अब तक शुरू भी नहीं हुए हैं।
सरकारी स्तर पर इन आंकड़ों को गंभीर माना जा रहा है। योजनाओं की धीमी प्रगति और अधूरे कार्यों को देखते हुए अब इसकी समीक्षा तेज कर दी गई है। सरकार का मानना है कि यदि योजना का असर जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा है तो इसके भविष्य पर पुनर्विचार जरूरी है।





