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DGP ने SP से मांगी जांच रिपोर्ट
नवगछिया: बिहार के नवगछिया पुलिस जिले में एक कार से 50 लाख रुपये नकद बरामद होने के मामले ने पुलिस मुख्यालय तक हलचल मचा दी है। इतनी बड़ी रकम मिलने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने पर बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने सख्त रुख अपनाया है। डीजीपी ने नवगछिया के एसपी को पूरे मामले की जांच करने और यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि आखिर इतनी बड़ी नकदी मिलने के बाद भी एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई।
कार की जांच में मिले थे 50 लाख रुपये
मामला नवगछिया पुलिस जिला क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान सामने आया था। पुलिस ने एक कार की तलाशी ली तो उसमें करीब 50 लाख रुपये नकद मिले। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने नकदी के स्रोत और उसे ले जाने के उद्देश्य के बारे में पूछताछ की। मामला इसलिए गंभीर हो गया क्योंकि भारी मात्रा में नकदी मिलने के बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसकी जानकारी पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने के बाद सवाल उठा कि मामले में कानूनी कार्रवाई किस आधार पर की गई और प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का निर्णय क्यों लिया गया।
DGP ने एसपी से पूछा- FIR क्यों नहीं हुई?
रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जानकारी मिलने के बाद डीजीपी ने नवगछिया एसपी को जांच के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह पता लगाने को कहा कि इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई। अब एसपी स्तर से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी। इसमें वाहन जांच करने वाले पुलिसकर्मियों की कार्रवाई, बरामद नकदी से जुड़े दस्तावेज और संबंधित लोगों से की गई पूछताछ का रिकॉर्ड देखा जा सकता है। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि रकम किसकी थी और उसे कहां से लाया जा रहा था।
नकदी के स्रोत की होगी जांच
कार से बरामद 50 लाख रुपये का स्रोत इस मामले का सबसे अहम पहलू है। इतनी बड़ी नकदी कहां से आई, किस व्यक्ति या संस्था की थी और उसे कहां ले जाया जा रहा था, इन सवालों के जवाब जांच में तलाशे जाएंगे। अगर रकम को लेकर वैध दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे तो उनकी भी जांच की जाएगी। वहीं किसी तरह की संदिग्ध वित्तीय गतिविधि सामने आने पर संबंधित एजेंसियों को सूचना देने और आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में केवल रकम के स्रोत की ही नहीं बल्कि पुलिस की शुरुआती कार्रवाई की भी समीक्षा होगी। डीजीपी के निर्देश के बाद यह देखा जाएगा कि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था या नहीं। विशेष रूप से इस बात की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी कि 50 लाख रुपये मिलने के बाद किन अधिकारियों को जानकारी दी गई, क्या कार्रवाई की गई और एफआईआर दर्ज नहीं करने के पीछे क्या आधार था। जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाह
डीजीपी की सख्ती के बाद अब नवगछिया एसपी की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई नियमों के मुताबिक थी या किसी स्तर पर चूक हुई। फिलहाल 50 लाख रुपये की बरामदगी से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। डीजीपी के हस्तक्षेप के बाद मामला अब पुलिस मुख्यालय की निगरानी में आ गया है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि बरामद रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और इतनी बड़ी नकदी मिलने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के पीछे क्या कारण था।
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