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3742 करोड़ के सोना घोटाले का पर्दाफाश
नवांशहर: देश में कथित फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। वस्तु एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (DGGI) की अमृतसर क्षेत्रीय इकाई ने करीब 3,742.08 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन और 112.4 करोड़ रुपये की कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच के तार पंजाब, चंडीगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक जुड़े बताए जा रहे हैं। कई सर्राफा कारोबारी और कथित मुखौटा प्रतिष्ठान जांच के दायरे में हैं। एजेंसी ने 25 अगस्त को इस नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े 31 लोगों और प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
छह साल तक चला कागजी कारोबार
जांच के मुताबिक कथित फर्जी कारोबार वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच चला। एजेंसी की जांच के केंद्र में जालंधर से जुड़ी कुछ फर्में हैं। आरोप है कि बिना वास्तविक सोना खरीदे या बेचे बड़ी मात्रा में कागजी बिल तैयार किए गए और इनके जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि नकद में सोना बेचने वाले कुछ कारोबारियों ने रकम को वैध लेनदेन के रूप में दिखाने के लिए इन प्रतिष्ठानों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। कथित तौर पर बिचौलियों के जरिए खातों में पैसा भेजा जाता था और कमीशन काटने के बाद रकम नकद वापस कर दी जाती थी।
कागजों पर दिखाया 175 करोड़ से ज्यादा का सोना
DGGI की जांच में बी-टू-बी बिलिंग का भी इस्तेमाल सामने आया है। आरोप है कि कुछ सर्राफा कारोबारियों ने केवल दस्तावेजों में करीब 175.38 करोड़ रुपये का सोना संबंधित फर्मों को बेचा हुआ दिखाया। एजेंसी का आरोप है कि वास्तविक माल की आवाजाही के बिना ही इन बिलों के जरिए कथित फर्जी ITC ट्रांसफर किया गया। वहीं कथित फर्जी आईटीसी को खपाने के लिए कारोबार का बहुत बड़ा हिस्सा सीधे ग्राहकों को बिक्री यानी बी-टू-सी के रूप में दिखाया गया। जांच में ऐसी बिक्री की कर-योग्य कीमत करीब 3,612.54 करोड़ रुपये बताई गई है।
मजदूरों के PAN-आधार के इस्तेमाल का आरोप
मामले का एक चौंकाने वाला पहलू आम लोगों और दिहाड़ी मजदूरों के दस्तावेजों से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कई लोगों के PAN और आधार कार्ड का इस्तेमाल उन्हें सोने का खरीदार दिखाने के लिए किया गया, जबकि उन्होंने वास्तव में सोना खरीदा ही नहीं था। इसी तरह कुछ कथित शेल फर्म और बैंक खाते तैयार कर लेनदेन दिखाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। एजेंसी अब दस्तावेजों, बैंक खातों और संबंधित कारोबारियों के बीच लेनदेन की कड़ियां खंगाल रही है।
कूरियर रिकॉर्ड से खुला खेल
दस्तावेजों में सोना मुंबई के आयातकों से निजी कूरियर के जरिए मंगाए जाने का दावा किया गया था। लेकिन जांच में कथित तौर पर सामने आया कि कई पार्सल संबंधित फर्मों तक पहुंचे ही नहीं। एजेंसी अब कूरियर रिकॉर्ड और सोना प्राप्त करने वाले कारोबारियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार पूरे नेटवर्क में वास्तविक सोने की आवाजाही और दस्तावेजों में दिखाई गई खरीद-बिक्री के बीच गंभीर अंतर मिला है। इसी आधार पर 112.4 करोड़ रुपये की अपात्र ITC का दावा और इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है।
बैंक खातों में 1356 करोड़ से ज्यादा जमा
जांच में तीन प्रमुख बैंक खातों में वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान करीब 1,356.72 करोड़ रुपये जमा होने और लगभग 1,354.35 करोड़ रुपये की निकासी का रिकॉर्ड सामने आने की बात कही गई है। दूसरे बैंक खातों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
सर्राफा बाजार में हड़कंप
DGGI की कार्रवाई के बाद अमृतसर, जालंधर, लुधियाना से लेकर मुंबई तक सर्राफा कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल है। जांच एजेंसी ने संबंधित लोगों और प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा है। केंद्रीय जीएसटी कानून के तहत कथित रूप से गलत तरीके से लिए गए टैक्स लाभ की वसूली और जुर्माने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। फिलहाल यह मामला जांच और नोटिस की प्रक्रिया में है। संबंधित कारोबारियों पर लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। लेकिन 3,742 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन और 112.4 करोड़ रुपये की कथित फर्जी ITC ने सोने के कारोबार में कागजी बिलिंग और टैक्स चोरी के संभावित नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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