
Bihar: रोहतास जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (संशोधन) 2017 के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने आवाज उठाई है। संघ ने गुरुवार को सांसद मनोज राम भारती को ज्ञापन सौंपकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त रखने और संशोधित प्रावधान को वापस लेने की मांग की। शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस नियम से देशभर के लगभग 30 लाख शिक्षकों पर असर पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि पांच वर्ष से अधिक सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने और प्रोन्नति पाने के लिए TET पास करना अनिवार्य किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में पुराने शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
संघ के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि TET की व्यवस्था 2011 में लागू हुई थी और उससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसकी बाध्यता लागू नहीं होती थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और एनसीटीई के प्रावधानों के अनुसार पुराने शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के तहत हुई थीं। ऐसे में उन पर नई शर्त थोपना उचित नहीं है। शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अचानक यह नियम मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति पैदा कर रहा है, जिसका असर स्कूलों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को यह भी बताया कि अनुभव और प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक पहले से ही शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इसलिए उन्हें TET की बाध्यता से छूट मिलनी चाहिए। सांसद मनोज राम भारती ने शिक्षकों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को संसद के आगामी मानसून सत्र में उठाएंगे और संबंधित मंत्रालय के समक्ष भी रखेंगे। इस मौके पर शिक्षक संघ के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने एकजुट होकर सरकार से राहत की मांग दोहराई।





