बिहार

चिरांद महोत्सव में दिखेगी प्राचीन सभ्यता की झलक

Saba Naaz
28 Jun 2026 6:20 PM IST
चिरांद महोत्सव में दिखेगी प्राचीन सभ्यता की झलक
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Bihar: छपरा में 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर विश्वप्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल चिरांद में 19वें चिरांद चेतना महोत्सव सह गंगा गरिमा रक्षा संकल्प समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन गंगा, सरयू और सोन नदियों के त्रिवेणी संगम तट पर स्थित चिरांद में किया जाएगा, जिसे 8 हजार साल पुरानी नवपाषाण कालीन सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य चिरांद की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और गंगा संरक्षण के संदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। कार्यक्रम के दौरान भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जो संध्याकालीन सत्र का मुख्य आकर्षण रहेगा। अनुमान है कि इस महाआरती के साक्षी एक लाख से अधिक लोग बनेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत विशेष चित्र प्रदर्शनी से होगी, जिसे पुरातात्विक स्थल स्थित भवन में लगाया जाएगा। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आगंतुकों को प्राचीन भारत की कृषि संस्कृति, नदी सभ्यता, सतत विकास मॉडल और चिरांद के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी जाएगी। प्रदर्शनी का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की प्राचीन परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण की सोच से जोड़ना है।

आयोजकों के अनुसार, वाल्मीकि रामायण में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र जनकपुर यात्रा के दौरान इस क्षेत्र में रुके थे। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए चिरांद को ‘राम अभ्युदय यात्रा केंद्र’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। महोत्सव के अध्यक्ष कृष्णकांत ओझा और सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस आयोजन में देशभर से संत-महात्मा, इतिहासकार, शोधकर्ता, विद्यार्थी और श्रद्धालु शामिल होंगे। साथ ही विदेशों से भी प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचेंगे।

कार्यक्रम में गंगा पूजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न धार्मिक आयोजन भी होंगे। आयोजन समिति का अनुमान है कि इस बार भारी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होंगे। चिरांद पहुंचने के लिए डोरीगंज के पास एनएच-19 से सीधा मार्ग उपलब्ध है। आयोजकों का कहना है कि चिरांद नवपाषाण कालीन सभ्यता का एक अनमोल केंद्र है, जहां से कई ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं, जिन्हें संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। इस महोत्सव के जरिए चिरांद को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास लगातार जारी है।

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