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Khagaria खगड़िया। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गुरुवार को महागठबंधन में शामिल नेताओं को हिदायत दी कि आप लोग बार-बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। अगर वाकई में कहीं पर कोई विसंगति है तो फौरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाइए, वहां पर आपको समाधान मिलेगा।
उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि यह अफसोस की बात है कि ये लोग बार-बार इन मुद्दों का जिक्र करके राजनीतिक स्थिति को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट नहीं जा रहे हैं। मैं ऐसे लोगों से यह कहना चाहूंगा कि अगर वाकई में इन मुद्दों में थोड़ी सी भी सच्चाई है तो तुरंत कोर्ट जाइए, लेकिन ये लोग वहां नहीं जाएंगे, बस लोगों के बीच में इसे बड़ा मुद्दा बनाकर पेश करेंगे, जिसे अब मौजूदा समय में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
चिराग पासवान ने कहा कि पहले ये लोग ईवीएम को मुद्दा बना रहे थे। लंबे समय तक इन्होंने इसे मुद्दा बनाया, लेकिन अब ये लोग इस पर खामोश हैं। इसका मतलब हुआ कि ईवीएम में कोई गड़बड़ी नहीं है। अब नए में इन लोगों ने वोट चोरी का मुद्दा उछाला। उछालने दीजिए, मैं दावे के साथ कहता हूं कि ऐसा करके इन लोगों को कुछ भी अर्जित होने वाला नहीं है। ये लोग इन मुद्दों का सहारा लेकर किसी भी सूरत में राजनीतिक स्थिति को अपने पक्ष में नहीं कर पाएंगे। अगर इन्हें ऐसा लग रहा है कि ये लोग ऐसा करके राजनीतिक स्थिति को बिहार में अपने अनुकूल कर लेंगे तो मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह इनकी गलतफहमी है, लिहाजा, इन्हें अपनी गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के 'सरकार चोरी' के आरोप पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह उनकी लगातार चुनाव हारने की हताशा का नतीजा है। उनके नेतृत्व में लगातार कांग्रेस पार्टी को चुनावी मैदान में हार का मुंह देखना पड़ रहा है तो ऐसी स्थिति में राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अब वे पार्टी के कार्यकर्ताओं को कैसे उत्साहित करें। लिहाजा, वे ऐसे उल-जुलूल मुद्दों को हवा दे रहे हैं ताकि वे पार्टी वर्कर को मोटिवेट कर सकें, लेकिन इससे इन लोगों को कुछ भी फायदा होने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस को लगातार हार का मुंह देखना पड़ रहा था तो एक वक्त में ऐसी स्थिति पैदा हो गई थी कि राहुल गांधी ने इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना जरूरी समझा, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को राहुल गांधी का यह कदम गवारा नहीं लगा। इसके बाद पार्टी ने इन्हें स्टार प्रचारक की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन, अफसोस, राहुल गांधी इसमें भी नाकाम रहे। वो लगातार अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के अरमानों पर पानी फेरते जा रहे हैं। मेरा राहुल गांधी, उनकी पार्टी कांग्रेस और महागठबंधन में शामिल अन्य नेताओं को सुझाव है कि वो इन मुद्दों को हवा देने की जगह अपने ऊपर काम करें, खुद को तैयार करें। अगर वो ऐसा करेंगे तो इस बात की संभावना है कि शायद इन लोगों का भला हो जाए।
उन्होंने चिराग पासवान के बयान पर कहा कि हम सभी का यह कर्तव्य होना चाहिए कि किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। हर व्यक्ति की अपनी धार्मिक भावनाएं होती हैं, हमें उनका सम्मान करना चाहिए। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ काम कर रहा है और यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं ठेस न पहुंचे। चुनाव आयोग ने इस दिशा में हाल ही में कई कदम उठाए।
वहीं, राहुल गांधी के बयान पर कहा कि पिछले कुछ दिनों से यह देखने को मिल रहा है कि संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाना एक चलन सा बन चुका है, लेकिन मैं राहुल गांधी को यह याद दिलाना चाहूंगा कि एक वक्त ऐसा भी था, जब उन्हीं की एक संस्था के व्यक्ति ने कई गंभीर आरोप लगाए थे, तब उस वक्त उन्होंने कहा था कि सीबीआई तोता है। ये सब कुछ कांग्रेस के शासनकाल से ही चला आ रहा है।
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