
पटना: बिहार के नवादा जिले से शुरू हुआ शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का एक बड़ा विवाद अब राजधानी पटना की सड़कों तक पहुँच गया है। नवादा जिले के रजौली अनुमंडल मुख्यालय स्थित राजकीय आंबेडकर आवासीय विद्यालय से कथित तौर पर निष्कासित किए गए 11वीं और 12वीं कक्षा के दर्जनों छात्र न्याय की गुहार लगाते हुए रविवार की सुबह पटना पहुंचे। राजधानी पहुंचते ही इन नाराज और लाचार छात्रों ने पटना के व्यस्त आर ब्लॉक (R-Block) चौराहे के समीप बीच सड़क पर जोरदार धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बेहद भावुक कर देने वाले घटनाक्रम में, नवादा से रातभर का सफर तय करके आए ये नौनिहाल चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच भूखे-प्यासे सड़क पर ही सोने को मजबूर हो गए, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित छात्रों के अनुसार, वे रविवार सुबह करीब पांच बजे ट्रेन के जरिए नवादा से पटना पहुंचे थे। छात्रावास और विद्यालय से बाहर निकाले जाने के बाद उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा था, जिसके कारण वे अपनी बात राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए सीधे पटना चले आए। आर ब्लॉक पर धरने के दौरान छात्रों के चेहरों पर जहां भविष्य को लेकर चिंता साफ दिखाई दे रही थी, वहीं व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश भी था। छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर 'हमें न्याय चाहिए', 'छात्रों के साथ जाति आधारित भेदभाव बंद करो' और 'दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करो' जैसे गंभीर नारे लगाए। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि वे पिछले कई दिनों से स्थानीय स्तर पर अपनी शिकायत अधिकारियों तक पहुंचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब हर जगह से उन्हें सिर्फ निराशा हाथ लगी, तब जाकर उन्हें पटना की सड़कों पर उतरना पड़ा।
पूरे विवाद की जड़ छात्रावास में मिलने वाले भोजन की बेहद खराब गुणवत्ता है। छात्रों का गंभीर आरोप है कि राजकीय आंबेडकर आवासीय विद्यालय के छात्रावास के मेस (MESS) में लंबे समय से अखाद्य और बेहद घटिया स्तर का भोजन परोसा जा रहा था, जिससे कई छात्रों की सेहत भी खराब हो रही थी। कई बार मौखिक रूप से शिकायत करने के बावजूद जब मेस की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ, तो छात्रों ने इसका पुरजोर विरोध किया और मामले की लिखित शिकायत प्रखंड कल्याण पदाधिकारी (BWO) से की। छात्रों का आरोप है कि इस जायज शिकायत पर ठेकेदार या मेस संचालकों पर कार्रवाई करने के बजाय, खुद अधिकारियों ने उल्टे छात्रों को ही दोषी ठहरा दिया। उन्हें अनुशासनहीन और उद्दंड करार देते हुए न केवल उनके साथ मारपीट की गई, बल्कि दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर छात्रावास से बाहर निकाल दिया गया।
पटना में आंदोलन करने से ठीक एक दिन पहले यानी शनिवार को इन बेसहारा छात्रों ने नवादा समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) पहुंचकर भी न्याय की गुहार लगाई थी। शनिवार को छात्रों ने समाहरणालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर बैठकर जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था और मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की थी। उस दौरान प्रदर्शन की सूचना मिलते ही भारी संख्या में सुरक्षा बल और पुलिस कर्मी मौके पर पहुंच गए थे और छात्रों को समझा-बुझाकर वहां से हटाया था। स्थानीय स्तर पर न्याय की उम्मीद पूरी तरह टूट जाने के बाद ही छात्रों ने पटना कूच करने का यह बड़ा फैसला लिया।
इस घटना ने दलित और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं और आवासीय विद्यालयों के जमीनी हकीकत की पोल खोलकर रख दी है। करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद छात्रों को कीड़े-मकोड़े वाले खाने का विरोध करने पर पढ़ाई से ही वंचित कर दिया गया। आर ब्लॉक पर भूखे-प्यासे धरने पर बैठे इन छात्रों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक दोषी अधिकारियों और मेस संचालक पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती और उन्हें दोबारा सम्मानपूर्वक विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाता, तब तक वे पटना से वापस नहीं लौटेंगे। फिलहाल इस संवेदनशील मामले पर सरकार के आला अधिकारियों द्वारा संज्ञान लिए जाने का इंतजार है।





